कांग्रेस की प्रत्याशी मुस्लिम चेहरा हैं। चुनावी माहौल को भांपकर वह पिछले कई महीनों से सक्रिय भूमिका में हैं। अपने पक्ष में माहौल भी बना रही हैं। उधर, सपा से पूर्व विधायक राधेश्याम जायसवाल और विधायक राकेश राठौर भी अपनी दावेदारी कर रहे हैं। पार्टी किसी एक पर दांव लगाएगी। सपा का जो भी प्रत्याशी होगा, उसे पार्टी का कैडर वोट तो मिलेगा, साथ ही प्रत्याशी का खुद का भी वोट बैंक होगा। कुल मिलाकर भाजपा और सपा ही कड़ा मुकाबला होगा। सियासी पंडितों की माने तो इस कड़े मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी सपा के मुस्लिम वोटों में सेंध जरूर लगाएंगी। ऐसे में अगर मुस्लिम वोटों का बिखराव होता है तो फायदा भाजपा को होने की पूरी संभावना है।
सपा का हो सकता नुकसान
कांग्रेस प्रत्याशी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाकर जहां एक ओर भाजपा को फायदा पहुंचा सकती हैं, वहीं भाजपा के कड़े मुकाबले में होने वाली सपा का नुकसान भी कर सकती हैं। मुस्लिम वोट बंटने से नुकसान सपा का ही होता नजर आ रहा है।
अब बसपा के प्रत्याशी पर टिकी निगाहें
भाजपा की निगाहें अब बसपा के प्रत्याशी पर टिकी हैं। सियासी रणनीतिकारों की माने तो अगर बसपा भी मुस्लिम चेहरे पर सदर विधानसभा सीट से दांव लगाती है तो इसका फायदा भाजपा को ही होगा। मुस्लिम वोट और बटेंगे। आप ने रविवार को सदर विधानसभा सीट पर आनंद जायसवाल को अपना प्रत्याशी उतार दिया है। ऐसे में आप प्रत्याशी भी बैक वर्ड वोटों को काटने का काम करेंगे।