वित्त नियंत्रक, अल्पसंख्यक कल्याण विनय श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इसमें कहा गया है कि 300 करोड़ रुपये लागत की परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनमें समय से राशि जारी की गई थी। इनमें बजट मिलने में देरी के तर्क को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
देरी के लिए सीएंडडीएस के इंजीनियर और अधिकारी जिम्मेदार हैं। समय से 300 करोड़ रुपये दिए जाने के बावजूद अब उन कामों को पूरा करने के लिए 150 करोड़ रुपये और मांगे जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि तमाम परियोजनाएं के बीच में ही सीएंडडीएस के इंजीनियर बदल दिए गए। कमीशन के खेल में उन्होंने समय से काम पूरा करने में कोई रुचि नहीं ली, बल्कि रिवाइज्ड एस्टीमेट भेजकर अधिक धनराशि ऐंठने के फेर में फंसे रहे।
कठोर कार्रवाई का निर्णय
प्रदेश सरकार ने निर्माण कार्यों में देरी के लिए जिम्मेदार इंजीनियरों और अधिकारियों को चिह्नित करने के आदेश दिए हैं। इन सभी मामलों में उच्चस्तर से दोषी कार्मिकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे, बर्खास्तगी, अनिवार्य सेवानिवृत्ति और रिकवरी की कार्यवाही का निर्णय लिया गया है।