वरिष्ठ कवयित्री महादेवी वर्मा छायावादी कविताओं के शीर्ष चार प्रमुख नामों में शामिल हैं। महिलाओं की शिक्षा के लिए उन्होंने काफी काम किया। वह विधान परिषद की सदस्य भी रहीं। एक ही सदन का सदस्य होने के नाते प्रो. पं. हरिकृष्ण अवस्थी को भी उनका स्नेह प्राप्त रहा जो लखनऊ विवि के कुलपति भी रहे।
अवस्थी ने उनसे जुड़ा एक संस्मरण लिखा है, ‘ महादेवी वर्मा को जवाहर लाल नेहरू सहित देश के कई बड़े नेता काफी सम्मान देते थे। एक दिन मैं उनके साथ बैठा हुआ था। उन दिनों देश में आपातकाल लग चुका था। इंदिरा गांधी की सरकार थी। इसी पर चर्चा चल रही थी।
तभी यह खबर आई कि हिंदी के विद्वान और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. रघुवंश पर तार काटने का आरोप लगा है। पुलिस ने मुकदमा लिखा है कि वे (रघुवंश) खंभे पर चढ़कर तार काट रहे थे। डॉ. रघुवंश दोनों हाथ से दिव्यांग थे। वे पैर के अंगूठे के सहारे लिखते थे। पानी उन्हें कोई और पिलाता था क्योंकि वे गिलास नहीं पकड़ सकते थे।