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सारेगामापा में गाने वाले सचिन ने झाड़ू-पोछा कर जुटाए संगीत सीखने के पैसे

Fri, 22 Apr 2016 02:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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पापा ने पहचानी सच‌िन की प्रत‌िभा - फोटो : Amar Ujala
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लोकप्रिय रियलिटी शो सारेगामापा के अंतिम 12 में जगह बनाने वाले लखीमपुर खीरी के सचिन कुमार वाल्मीकि के चेहरे पर मुस्कुराहट कम ही है। वास्तव में लंबे संघर्ष, गरीबी और उपेक्षा झेलने के बाद अब वह धीरे-धीरे मुस्कुराना सीख रहा है। 
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नगरपालिका में सफाई कर्मी का बेटा सचिन सोमवार को नगर में था। सचिन ने बताया कि मैं सात वर्ष की उम्र से गा रहा हूं। मेरी प्रतिभा को सबसे पहले मेरे माता-पिता ने ही पहचाना। 

पापा मुन्नालाल वाल्मीकि ने मुझे पहला गाना ‘का करूं सजनी...’ सिखाया। मैं घंटों आइने के सामने बैठकर गाया करता था क्योंकि मुझे लगता था कि गाते समय मेरी भाव-भंगिमाएं बहुत खराब बनती हैं।
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सचिन कुमार ने बताया कि मेरे घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि संगीत सीखने के लिए पैसों का प्रबंध हो सके। मैं रेस्टोरेंट में काम करता था। लोहिया भवन में झाड़ू-पोछा करता था फिर भी एक बार मेरे पास 50 रुपये कम पड़ गए तो मुझे उस संगीत संस्थान से निकाल दिया गया जहां मैं संगीत सीखता था। 

मैं वहां सुगम संगीत सीखाता भी था और उसके कोई पैसे नहीं लेता था लेकिन 350 रुपये में 50 रुपये कम थे और मुझे नियमों का हवाला देते हुए संस्थान से निकाल दिया गया।

तय किया कि कुछ बन कर दिखाऊंगा

घंटों आइने के सामने की र‌ियाज - फोटो : Amar Ujala
सचिन ने बताया कि जिस दिन मुझे 50 रुपये कम होने पर संगीत नहीं सीखने दिया गया उसी दिन मैंने तय किया कि कुछ बनकर दिखाऊंगा। 

मैं सुबह चार से छह बजे तक अभ्यास करता था। मैं जहां अभ्यास करता था वह घर से काफी दूर एक टूटा-फूटा कमरा है, जिसमें बारिश में पानी टपकता है। मैं की-बोर्ड, तबला, ढोलक, ड्रम बजाना जानता हूं हालांकि मैंने इसे कहीं से सीखा नहीं है।

सचिन ने कहा कि सारेगामापा में मेरे चयन के बाद अब कई लोग यह दावा करते हैं कि मैंने सचिन की मदद की, लेकिन सच्चाई यह है कि मेरी किसी ने मदद नहीं की। कम पैसे के कारण मैं संगीत ठीक ढंग से नहीं सीख सका। 
मुझे काम करना पड़ा। लखनऊ आया तो एक युवा संगीतकार ने कुछ दिन सिखाने के बाद मना कर दिया। मैं खुद से ही संगीत सीखता रहा।

सचिन के अनुसार, उसके पिता जी कई बार जब बीमार होते तो उसे उनकी जगह सफाई करने जाना होता था। ऐसे में वह कई बार उस श्याम प्रकाश इंटर कॉलेज के सामने भी सफाई करता था, जिसमें पढ़ता था। शर्म के कारण उसने हाईस्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ दी।
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मां-पिता के नाम से बनवाऊंगा अनाथालय

माता-प‌िता के साथ सच‌िन - फोटो : Amar Ujala
सचिन कुमार वाल्मीकि ने बताया कि लखीमपुर खीरी में मैंने बहुत सारे बच्चों को नि:शुल्क सीखाया। कई बच्चे आज भातखंडे संगीत संस्थान में सीख रहे हैं। कई बच्चे आज प्रतीक्षा कर रहे हैं कि मैं मुंबई से लौटूंगा और उन्हें सिखाऊंगा तथा उनकी फीस दूंगा।

सचिन ने कहा कि मैं अगर कुछ बन सका तो अपने मां-बाप के नाम से अनाथालय बनवाऊंगा, जिसमें अनाथ बच्चों के लिए सारी सुविधा होगी। उनके संगीत सीखने की व्यवस्था भी होगी।

सचिन ने कहा कि मैं सारेगामापा में जीतू या हार जाऊं, मेरे लिए इतना ही पर्याप्त है कि मैं देश के ऐसे संगीत गुरुओं, संगीताकारों से मार्गदर्शन ले पा रहा हूं जिनकी मैंने कभी कल्पना नहीं की थी। प्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम जी के मैं घर भी रहा हूं। शंकर महादेवन और रूप कुमार राठौर मेरे आदर्श हैं।
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