भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की आगरा रैली में
रासुका में निरुद्ध रहे विधायक सुरेश राणा और संगीत सोम के सम्मान को लेकर
विवाद उठ गया है।
सपा ने दोनों विधायकों के सम्मान को सांप्रदायिकता का
महिमा मंडन बताया है।
इसके जवाब में भाजपा ने कहा है कि मुजफ्फरनगर दंगे के
आरोपी मौलाना को राजकीय अतिथि बनाने वाले और एकपक्षीय कार्रवाई करने वालों
से उसे कोई प्रमाणपत्र नहीं चाहिए।
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सपा के
प्रदेश प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि विधायकों की
आड़ में सांप्रदायिकता को महिमा मंडित करने की हर किसी को भर्त्सना करनी
चाहिए।
भाजपा का मूल चरित्र ही सांप्रदायिक है और उसका काम अलगाववाद फैलाना
रहा है। भाजपा के मूल संगठन आरएसएस को इसी चरित्र के लिए आजादी के बाद
तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सरदार पटेल ने प्रतिबंधित किया था।
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भाजपा के
दोनों विधायकों ने अपने भड़काऊ भाषणों से मुजफ्फरनगर की घटना को
सांप्रदायिक रंग देकर सामाजिक तानाबाना तोड़ने और आपसी सद्भाव बिगाड़ने का
काम किया था।
उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री बनने की मृगमरीचिका पाले नरेन्द्र
मोदी यूपी सहित पूरे भारत को गुजरात की राह पर ले जाने का कुत्सित इरादा
रखते हैं।
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राजेन्द्र चौधरी के बयान पर भाजपा
प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है। उन्होंने सवाल
किया कि क्या सांप्रदायिक आधार पर फैसले लेकर सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाली
एक परिवार की पार्टी तय करेगी कि भाजपा राजनीतिक दल है अथवा नहीं।
सांप्रदायिकता का आरोप लगाने वाले बताएं कि एक समुदाय विशेष की बालिकाओं को
लाभ देना क्या फिरकापरस्ती नहीं है। भाजपा को सांप्रदायिक संगठन बताने
वालों को अपना ज्ञानवर्धन कर लेना चाहिए।
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