सपा में भाजपा एवं बसपा के विधायकों के आने का सिलसिला जारी है। इससे पार्टी में उत्साह तो है, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है इन सभी को लामबंद रखना पार्टी के लिए चुनौती होगी। दूसरे दल से सपा में आने वाले विधायक 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ने की बात पक्की करके ही आए होंगे।
पूर्व के चुनाव में सपा के प्रत्याशी रहे सहित अन्य पार्टी नेता भी संबंधित सीट पर दावेदार हैं। ऐसे में आपसी टकराव बढ़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि टिकट वितरण के बाद सपा के शीर्ष नेतृत्व के लिए इस टकराव को रोकना और सभी को लामबंद रखना चुनौती होगी।