महिला अपराध और अत्याचार के मुद्दे पर मंगलवार को विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों के नेता आंकड़ों में उलझ गए। विपक्ष ने केंद्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के आधार पर भाजपा शासन में बलात्कार, हत्या, दहेज हत्या, अपहरण और हिंसक अपराधों में बढ़ोतरी का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने कहा कि खेत-खलिहान, मैदान बागान और गली सड़क तक चर्चा है कि प्रदेश में अपराध बढ़े रहे हैं और कानून व्यवस्था ध्वस्त है। वहीं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने विपक्ष के दस्तावेजों पर शक जताते हुए प्रदेश के गृह विभाग की रिपोर्ट के आधार पर अपराधों में कमी आने का दावा किया। उन्होंने कहा कि जनदृष्टिकोण (परसेप्शन) से बड़ा कोई मापदंड नहीं होता है, जनता की दृष्टि में यूपी में अपराधों में कमी हुई है और कानून व्यवस्था की दृष्टि से यूपी नंबर वन है।
सपा सदस्य उज्ज्वल रमण सिंह के सवाल के जवाब में सुरेश खन्ना ने कहा कि 2017 में महिला अपराधों से जुड़े 51587, 2018 में 53608 और 2019 में 49867 मामले दर्ज हुए। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने एंटी रोमियो स्क्वाएड, वीमेन पावर लाइन 1090 और 112 हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं लागू की हैं। दहेज हत्या के मामलों में कमी आई है 2017 में 2524, 2018 में 2444 और 2019 में 2375 मामले दर्ज हुए। बलात्कार के मामलों में भी कमी आई है, 2017 में 4246, 2018 में 3946 और 2019 में 2858 मामले दर्ज हुए। शील भंग के मामलों में भी सरकार की सख्ती से कमी आई है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने अपराध और अत्याचार के मामलों प्रभावी कार्रवाई भी की है। खन्ना ने कहा कि विपक्षी दलों के नेता जिन दस्तावेजों के आधार पर दावा कर रहे हैं वे फोटो प्रति है। जबकि वे गृह विभाग के अधिकृत आंकड़े बता रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि प्रदेश में लगातार अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है। हत्या के मामले 13.8, हिंसक अपराध के 13.2, अपहरण के 20.5, महिला अत्याचार के 15.07, एससी-एसटी अपराध में 27.09 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने पूछा कि केंद्र सरकार के एनसीआरबी के आंकड़ों को सही माना जाए या संसदीय कार्य मंत्री के आंकड़े को। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के आंकड़े गलत नहीं है, लेकिन आपके हाथ में जो पेपर है उन पर शक किया जा सकता है।
अपराध में कमी नहीं आई
बसपा के नेता लालजी वर्मा ने कहा कि अपराधों में कहीं कमी नहीं आई है। एनसीआरबी के आंकड़े बता रहे हैं कि 2017 से 2019 के बीच यूपी में अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। इस पर सुरेश खन्ना ने कहा कि 2007 से 2017 तक बसपा के सदस्यों को एनसीआरबी के आंकड़े याद नहीं आए। लालजी वर्मा ने दावा किया कि बसपा सुप्रीमो मायावती की सरकार के समय उत्तर प्रदेश में अपराध सबसे कम थे।
सपा शासन की तुलना में बढ़ गए अपराध
सपा के उज्जवल रमण सिंह ने कहा कि सपा सरकार की तुलना में योगी सरकार में अपराध बढ़ गए हैं। 2012-17 तक दहेज हत्या के 7 से कम मामले प्रतिदिन दर्ज होते थे, अब 32 से अधिक दर्ज हो रहे है। बलात्कार के 8 से कम मामले रोज दर्ज होते थे, अब यह संख्या 52 हैं।