समाजवादी पार्टी ने बुधवार को विधान परिषद चुनाव के लिए दो प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। सपा ने अभी तक उच्च सदन में नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन और पूर्व मंत्री व राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चौधरी को चुनाव में उतारा है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने विधायकों के साथ बैठक करके विधान परिषद चुनाव की रणनीति पर मंथन कर दोनों को जिताने का जिम्मा विधायकों को सौंपा है।
सपा ने अहमद हसन को पांचवीं बार एमएलसी चुनाव में प्रत्याशी बनाया है। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी 88 वर्षीय हसन चार बार विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं। वह मुलायम सिंह और अखिलेश यादव की सरकार में काबीना मंत्री रहे हैं। फिलहाल वह विधान परिषद में नेता विरोधी दल हैं। राजेन्द्र चौधरी सपा के वरिष्ठतम नेताओं में शुमार हैं। मेरठ विश्वविद्यालय से छात्र नेता के तौर पर राजनीति पारी की शुरुआत करने वाले 73 वर्षीय राजेन्द्र चौधरी 1969 में पहली बार आंदोलन में जेल गए थे। उस समय वह समाजवादी युवजन सभा से जुड़े हुए थे।
चौधरी चरण सिंह ने उन्हें 1974 में पहली बार भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) प्रत्याशी के रूप में गाजियाबाद से विधानसभा का टिकट दिया था। वह सबसे कम उम्र के प्रत्याशी थे, हालांकि चुनाव हार गए थे। 1977 में वह पहली बार विधायक चुने गए। इस दौरान वह जनता पार्टी की यूथ विंग के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। चौधरी समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं। अखिलेश यादव सरकार में वह एमएलसी और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।