धर्मगुरू रामभद्राचार्य ने कहा कि 23 नवंबर को केन्द्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के साथ चर्चा हुई । उन्होंने आश्वासन दिया है कि 11 दिसंबर को चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री साधु संतों के साथ बैठेंगे और ऐसा फैसला होगा जो राम मंदिर निर्माण का रास्ता खोलेगा।
उन्होंने कहा ‘हमें यह भी बताया गया कि हमसे धोखाधड़ी नहीं की जाएगी। संसद के शीतकालीन सत्र में अध्यादेश लाया जा सकता है । हमें धैर्य रखना चाहिए । न्यायालय से हम निराश हो चुके हैं। जनता की अदालत हमें धोखा नहीं देगी ।’
इससे पहले विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चम्पत राय ने कहा कि उन्हें मंदिर के लिये जमीन के बंटवारे का फार्मूला मंजूर नहीं है और उन्हें पूरी की पूरी भूमि चाहिये। राय ने कहा कि 'हमें बंटवारे का फार्मूला मंजूर नहीं है । हमें (जमीन का) टुकड़ा नहीं चाहिये। राम मंदिर के लिये पूरी की पूरी भूमि चाहिये।'
उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हर हिन्दू का सपना है और यह हर हाल में बनकर रहेगा।