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विहिप किस हैसियत से मांग रहा जमीन, बाबरी मस्जिद के पक्षकारों ने दी तीखी प्रतिक्रिया

Sun, 25 Nov 2018 06:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी - फोटो : amar ujala
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बाबरी मस्जिद मामले के पक्षकार हाजी महबूब ने विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विहिप किस हैसियत से जमीन मांग रही है। वे कौन होते हैं इस तरह की मांग करने वाले। वे न तो पक्षकार है, सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। केस वापस लेने के बयान पर भी वे नाराज दिखे, कहा कि हम केस क्यों वापस लेंगें, वापस लेने का कोई आधार भी नहीं है। वे कुछ नहीं है तो किस हैसियत से अयोध्या मामले में अड़ंगा डालने का प्रयास लगातार कर रहे हैं।

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सुप्रीम कोर्ट में जाकर दावा करें चंपत राय: इकबाल
बाबरी मस्जिद मामले के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद न मामले में पक्षकार है, न ही देश की सरकार, आखिर वह किस हैसियत से विवादित जमीन पर दावा कर रहे हैं। भीड़ जुटाने से संविधान का गला नहीं घोंटा जा सकता। सबसे बड़ा सुप्रीम कोर्ट है, मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, विहिप को पूरी जमीन चाहिए तो सुप्रीम कोर्ट से मांगें। जमीन का बंटवारा हाईकोर्ट ने किया था, इसके खिलाफ हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षकार सुप्रीम कोर्ट में दावा  कर चुके हैं, सुनवाई चल रही है, जो निर्णय आएगा वही मान्य होगा।

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मालिकाना हक हमारा है, विहिप कौन: निर्मोही अखाड़ा

रामजन्मभूमि मामले के पक्षकार निर्मोही अखाड़ा के पक्षकार प्रतिनिधि महंत दिनेंद्र दास कहते हैं कि विहिप इस मुद्दे में कुछ नहीं है, उनसे पहले हम 1885 से ही मुकदमा लड़ रहे हैं। हाईकोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा, रामलला और सुन्नी वक्फ बोर्ड को बराबर-बराबर हिस्से में बंटवारा का फैसला किया था। हमने सुप्रीम कोर्ट से पूरी जमीन मांगी है राममंदिर के लिए। मालिकाना हम हमारा है विहिप कौन होता है। रामजन्मभूमि के नाम पर विहिप भाजपा की सियासत साध रही है।

चुनावी ड्रामा है विहिप की राममंदिर के लिए धर्मसभा: धर्मदास
रामजन्मभूमि मामले के पक्षकार महंत धर्मदास ने कहा कि धर्मसभा के बहाने विहिप चुनावी ड्रामा कर रही है। विहिप राममंदिर के लिए जमीन मांगने वाली कौन होती है, इनका इतिहास क्या है। भीड़ जुटाकर किसी का हक नहीं ले सकते। वादी नहीं है, पार्टी नहीं है तो सरकार की हैसियत से जमीन मांग रहे हैं, जब चुनाव नजदीक आता है तो शिगूफा छोड़ने अयोध्या चले आते हैं।
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