लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट में सहारा हाउसिंग कंपनी की अपील खारिज होने के बाद स्वप्ना रॉय ने सहारा शहर को खाली करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही इसकी जमीन पर नई विधानसभा बनने का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। यहां सचिवालय और मुख्यमंत्री आवास बनाने पर भी मंथन हो रहा है।
नगर निगम के संपत्ति विभाग के प्रभारी राम प्रसाद ने बताया कि निगम सुप्रीम कोर्ट में केस जीत चुका है। नगर निगम को सिर्फ जमीन से मतलब है। इस कारण स्वप्ना राय को सामान निकालने की अनुमति दी गई है। एक-दो दिन में पूरा सामान चला जाएगा।
लीज का 30 वर्ष का समय पूरा होने और शर्तों के उल्लंघन पर नगर निगम ने अक्तूबर के पहले सप्ताह में सहारा शहर को कब्जे में ले लिया था। लीज निरस्त करने के विरोध में सहारा कंपनी हाईकोर्ट गई। वहां से राहत न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने भी 16 मार्च को अपील खारिज कर दी।
विधानसभा बनने का रास्ता पूरी तरह साफ
सहारा शहर की जमीन पर नई विधानसभा बनाने में अब कोई कानूनी बाधा भी नहीं रह गई है। नगर आयुक्त गौरव कुमार का कहना है कि जमीन पर क्या बनेगा, यह शासन और सरकार तय करेगी। लीज निरस्त होने के बाद नगर निगम ने जमीन को कब्जे में ले लिया था और अब सुप्रीम कोर्ट से केस जीतने के बाद किसी तरह का कोई कानूनी विवाद भी नहीं रह गया है। नगर निगम की 170 एकड़ की जमीन सुरक्षित है।