संगठन व संघ के कार्यों के विस्तार और समन्वय की चिंता के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की तीन दिन से यहां निरालानगर स्थित सरस्वती कुंज में चल रही बैठक रविवार को समाप्त हो गई।
इसी के साथ प्रतिनिधियों का लौटना भी शुरू हो गया। परंपरा के अनुसार, रविवार को भाजपा, विद्यार्थी परिषद, भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ जैसे 30 संगठनों के प्रतिनिधियों का लौटना शुरू हो गया। सोमवार को प्रांत प्रचारक और अन्य पदाधिकारी तथा मंगलवार को क्षेत्र प्रचारक व अन्य क्षेत्रीय पदाधिकारी लौटेंगे। बुधवार को सरसंघचालक व अन्य केंद्रीय पदाधिकारी जाएंगे। जिसमें संघ ने उन पांच चुनौतियों पर चर्चा की जिस पर संगठन को काम करना है।
हिंदुओं के खिलाफ चल रही साजिशों का पर्दाफाश करना
सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों से देश में संघ परिवार के लिए बन रही अनुकूल परिस्थितियों का लाभ उठाकर लोगों के बीच पकड़ व पैठ बनाने का आह्वान किया। साथ ही हिंदू समाज को एकजुट करने और हिंदू समाज के विरुद्ध चल रही साजिशों का पर्दाफाश करने को कहा। मतलब साफ है, संघ हिंदुओं को भाजपा के पक्ष में एकजुट रखना चाहता है। जिससे कि आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका लाभ लिया जा सके।
हालांकि, भागवत ने महाराष्ट्र व हरियाणा के चुनाव नतीजों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि कुछ महीने पहले शुरू हुए बड़े परिवर्तन का दौर लगातार जारी है। देश की जनता राष्ट्रवादी शक्तियों का साथ देने को तत्पर है। हमें भी इसका स्वागत करना चाहिए।
मोदी सरकार पर जनता का भरोसा कायम रखना
जानकारी के मुताबिक, सरसंघचालक ने कहा कि केंद्र सरकार को थोड़ा वक्त देना चाहिए। माना जा रहा है कि उन्होंने यह बात स्वदेशी जागरण मंच और भारतीय किसान संघ जैसे संगठनों की तरफ से बैठक के दौरान केंद्र की नीतियों पर रोष जताने के मद्देनजर कही है।
संघ जानता है कि यूपी के विधानसभा चुनाव में ढ़ाई साल का वक्त है। ऐसे में संघ का मकसद है कि जनता का सरकार पर भरोसा कायम रहे। सरसंघचालक ने पाकिस्तान की तरफ से हो रही गोलाबारी की निंदा की। साथ ही केंद्र सरकार की पीठ भी थपथपाई। कहा कि चीन से घुसपैठ हो या पाकिस्तान की तरफ से आतंक फैलाने की कोशिश, अभी तक सरकार ने ठीक ही जवाब दिया है।
तालमेल की कमी पर जताई चिंता
रविवार सुबह के सत्र में संगठनों की समीक्षा का दौर चला। इस दौरान कुछ प्रतिनिधियों ने संघ परिवार के विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय की कमी पर चिंता जताई।
कहा गया कि इसकी वजह से कई कार्यक्रम संख्या के लिहाज से प्रभावी नहीं हो पाते, जिससे समाज में भी गलत संदेश जाता है। कई बार एक ही नगर में अलग-अलग संगठनों के कार्यक्रमों की तिथियां आपस में टकराती हैं। नतीजतन कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी कम होती है।
हिंदू विरोधी ताकतों को रोकने की फिक्र
बैठक में देश की आंतरिक व सीमा पर मौजूदा हालात पर भी बातचीत हुई। प्रतिनिधियों ने कहा कि केंद्र में सरकार बनने के बावजूद हिंदू विरोधी ताकतें बाज नहीं आ रही हैं। यह बात सिर्फ उत्तर प्रदेश के साथ ही अन्य राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने भी कही।
बताया कि तरह-तरह से हिंदुओं के उत्पीड़न की कोशिशें होती हैं। कई जगह तो राज्य सरकार की नीतियां हिंदू विरोधी ताकतों की मदद करती हैं। इसलिए केंद्र सरकार से इस बारे में कोई ठोस कदम उठाने का आग्रह करना चाहिए। कुछ ने सीमाओं पर चीन व पाकिस्तान की तरफ से होने वाली घुसपैठ और पाकिस्तान की तरफ से नागरिकों पर की जा रही गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब देने की जरूरत बताई।
कुछ प्रमुख प्रतिनिधियों ने संघ परिवार की शक्ति व संगठन के विस्तार के लिए मुस्लिम विरोधी छवि तोड़ने की जरूरत बताई।
कुछ ने कहा कि यह संदेश तो दिया जाए कि संघ मुसलमानों का विरोधी नहीं है, पर तुष्टीकरण की नीति का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए। देश के सभी नागरिकों से बराबरी का व्यवहार होना चाहिए। मतलब यह कि संघ मुस्लिमों को भी भाजपा से जोड़ना चाहता है।
'लव जेहाद' भी चुनौती
बैठक में लव जेहाद पर भी चर्चा हुई। कई प्रतिनिधियों ने कहा कि इस मामले में आरोपियों को ज्यादातर राजनीतिक दलों की सरकारों का समर्थन व संरक्षण मिलने से उनके हौसले बढ़ते हैं।
इसकी वजह से उत्तर प्रदेश सहित कई जगह पर हिंदुओं को अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए संघ इस समस्या से पार पाने के लिए भी लोगों के बीच जागरुकता अभियान चलाएगा।