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मिशन 2019 मोड में संघ, मथुरा में तैयार होगा अगली सत्ता का ब्लू प्रिंट

Sun, 27 Aug 2017 10:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मोहन भागवत व अमित शाह - फोटो : amar ujala
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लोकसभा चुनाव में वैसे तो लगभग सवा साल बाकी है, पर भगवा टोली को केंद्र में अगली सत्ता की चिंता सताने लगी है। इसके लिए अगले महीने मथुरा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की समन्वय बैठक बुलाई गई है।
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केशव धाम में 1 से 3 सितंबर तक होने वाली इस शीर्ष फोरम की बैठक में मौजूदा राजनीतिक व सामाजिक स्थितियों की समीक्षा के साथ लोकसभा के अगले चुनाव की तैयारियों का खाका खींचा जाएगा। इस दौरान यूपी सरकार के कामकाज का भी मूल्यांकन होगा। साथ ही संघ परिवार के सामने मौजूद चुनौतियों और कार्यकर्ताओं तथा जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के उपायों पर चर्चा होगी।

बैठक का महत्व इसी से पता चल जाता है कि यह लगभग छह साल बाद हो रही है। इससे पहले मुंबई में इस तरह की बैठक हुई थी। संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, सरकार्यवाह सुरेश जोशी भैयाजी की मौजूदगी में हो रही बैठक में संघ के क्षेत्रीय प्रचारक और उनसे ऊपर के पदाधिकारियों को बुलाया गया है। भाजपा सहित संघ परिवार के अन्य लगभग 40 संगठनों के राष्ट्रीय स्तर के चुनिंदा पदाधिकारी इसमें शामिल होंगे। बैठक में भाजपा से राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तथा राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) रामलाल भी रहेंगे।
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इसके अलावा केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय वित्त व रक्षा मंत्री अरुण जेटली, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल के भी बैठक के कुछ सत्रों में रहने की संभावना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा सहित अन्य कुछ मंत्री भी सरसंघचालक या भाजपा अध्यक्ष से मिलने मथुरा पहुंच सकते हैं।

लोकसभा चुनाव के लिए होगी तैयारियों पर चर्चा

- फोटो : metrovaartha
तीन दिनी बैठक में तमाम लोगों का 28 से ही पहुंचना शुरू हो जाएगा। बैठक में केंद्र और भाजपा शासित राज्यों की सरकारों के काम का मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही संघ परिवार के सभी संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों तथा संगठन मंत्रियों से बातचीत करके समझने की कोशिश की जाएगी कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कहां और क्या करने की जरूरत है, जिसके बारे में भाजपा नेतृत्व को सलाह दी जाए।

मंदिर से लेकर केरल तक पर बात
माना जा रहा है कि बैठक का एक मकसद संगठन के लोगों का सरकार के कामकाज को लेकर जनता का फीडबैक जानना भी है। कानून-व्यवस्था, जनता और कार्यकर्ताओं की अपेक्षा पर सरकार की जनता के बीच कैसी स्थिति है। कहां के कौन-से संगठन की भाजपा सरकार से और क्या अपेक्षा है। संगठन और सरकारों के बीच समन्वय के लिए और क्या करने की जरूरत है।

एजेंडे को धार देने के लिए अभी क्या करना बाकी रह गया है। बैठक में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर आगे की रणनीति, कश्मीर की स्थिति, केरल में संघ कार्यकर्ताओं की हो रही हत्याओं और उन्हें रोकने में केंद्र सरकार की भूमिका, गोवध, नदियों की सफाई, शिक्षा में भारतीय अस्मिता के सरोकारों से जुड़े पाठों के संबद्धीकरण सहित कई मुद्दों पर बातचीत प्रस्तावित है।
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यह है वजह

भगवा टोली के रणनीतिकारों को शायद लग रहा है कि किसी स्तर पर चूक या ढील दूसरी बार सत्ता पाने के सपने को पूरा करने में रोड़ा डाल सकती है। इसीलिए वे समय रहते रोड़ों को समझकर उन्हें हटा लेना चाहते हैं।

जानकारी के मुताबिक, बैठक में केंद्र और देश के अलग-अलग राज्यों में भाजपा सरकारों के कामकाज की सच्चाई समझकर उनके कार्यकर्ताओं तथा जनता की कसौटी पर खरा उतरने के उपाय तलाशे जाएंगे।
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