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नई शुरुआत : एसजीपीजीआई में आज से होगी रोबोटिक सर्जरी, जानें- क्या हैं फायदे

Sat, 08 Jun 2019 10:45 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ रोबोटिक सर्जरी करने वाला प्रदेश का पहला केंद्र बन गया। एसजीपीजीआई में शनिवार को इसकी औपचारिक शुरुआत हुई। संस्थान ने पहले चरण में 250 मरीजों की रोबोटिक सर्जरी मुफ्त करने का फैसला किया है। खास बात है कि इसके लिए मरीज को अलग से नंबर लगाने की जरूरत नहीं, उसे सीधे संबंधित विभाग की ओपीडी में दिखाना होगा। 

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एसजीपीजीआई में प्रायोगिक तौर पर आठ मरीजों के सफल ऑपरेशन के बाद शनिवार को चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने रोबोटिक सर्जरी का उद्घाटन किया। करीब 30 करोड़ की लागत से खरीदे गए रोबोट और अन्य उपकरण को माड्यूलर ऑपरेशन थियेटर में लगाया गया है। 

यहां केहर चिकित्सा विशेषज्ञ को 40-40 सर्जरी करनी होगी। इतने केस करने के बाद ही उन्हें एक्सपर्ट माना जाएगा। फिलहाल वे हैदराबाद के रोबोटिक सर्जन डॉ. जगदीश गौड़ के नेतृत्व में सर्जरी करेंगे। इस बीच डॉ. गौड़ यहां के चिकित्सकों को एक-एक केस की बारीकियों से वाकिफ कराएंगे। 

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एसजीपीजीआई
हर ऑपरेशन के वक्त वह एक्सपर्ट के तौर पर ऑपरेशन थियेटर में मौजूद रहेंगे। अभी इंडोक्राइन सर्जरी, गैस्ट्रो सर्जरी, यूरोलॉजी और कार्डियोलॉजी, सीटीवीएस विभाग से संबंधित मरीजों की सर्जरी की जाएगी। फिलहाल निदेशक प्रोफेसर राकेश कपूर, सीएमएस प्रोफेसर अमित अग्रवाल सहित आठ चिकित्सक रोबोटिक सर्जरी का प्रशिक्षण ले चुके हैं। 

अगले चरण में कुछ अन्य चिकित्सकों को भी प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. राकेश कपूर कहते हैं कि इससे जटिल सर्जरी आसान हो जाएगी। खून कम निकलेगा और संक्रमण का खतरा न के बराबर रहेगा।

किस-किस तरह की सर्जरी में सफलता दर अधिक

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
सीएमएस प्रोफेसर अमित अग्रवाल ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी का उपयोग प्रोस्टेट कैंसर और थायराइड ग्रंथि से जुड़ी सर्जरी में खासतौर से होता है। इसकी सफलता दर शत प्रतिशत रही है। यहां भी इन मरीजों को वरीयता दी जाएगी। 
रोबोटिक सर्जरी के जरिए रेक्टर कैंसर के केस में आंत को जोड़ने, बड़ी आंत से संबंधित ऑपरेशन, गुर्दा रिमूवल, हार्ट के वॉल्व, लंग सर्जरी, पाइलोप्लास्टी सर्जरी में खासतौर से किया जाता है। ये ऑपरेशन काफी जटिल और बारीक माने जाते हैं। किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट के वक्त भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

खर्च थोड़ा ज्यादा 
  • ओपेन सर्जरी  : 40 से 50 हजार रुपये
  • लेप्रोस्कोपिक सर्जरी : 80 से 90 हजार रुपये
  • रोबोटिक सर्जरी : करीब 1 से डेढ़ लाख

...पर कई फायदे हैं इसके, आप भी जानिए

  • मरीज को फायदा : संक्रमण का डर नहीं होता। दूसरे कम रक्तस्राव के कारण खून की जरूरत नहीं पड़ती है। साथ ही इसमें महज आठ एमएम का चीरा लगता है, जबकि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में 10 से 12 एमएम का चीरा लगाया जाता है।
  • रेजीडेंट्स को फायदा : अभी तक बेसिक व एडवांस प्रशिक्षण के लिए विदेश जाना पड़ता था। इस पर करीब 3500 से 6500 डालर खर्च आता था। अब यहीं प्रशिक्षण संभव होगा, जिससे खर्च लगभग शून्य हो जाएगा। 
  • बेहतर तकनीक : दूरबीन विधि से सर्जरी में 180 डिग्री और टू डायमेंशन का विकल्प होता है। इसमें 360 डिग्री मूवमेंट और थ्री डायमेंशन का विकल्प। यह ज्यादा प्रभावी होता है। 
  • चिकित्सकों को फायदा : आम तौर पर सर्जरी में लगने वाले समय की तुलना में रोबोटिक सर्जरी में 30 से 40 मिनट बचेगा। 
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सर्जन के निर्देशन में मशीन करती है अपना काम

जर्मन में बनी दा विंची रोबोट मशीन में हाई डेफिनिशन थ्री-डी कैमरा लगा होता है। ऑपरेशन टेबल पर मरीज को लेटाना के बाद संबंधित स्थान पर मशीन फिट की जाती है। जिस अंग का ऑपरेशन करना होता है, वहां पर तीन छेद करके थ्री-डी हाई डेफिनिशन विजुअल सिस्टम से छोटे उपकरण शरीर में प्रवेश कराए जाते हैं। 

इसके बाद कंसोल पर बैठ सर्जन निर्देश देना शुरू करते हैं और मशीन उसी आधार पर सर्जरी करती है। इसी कंसोल पर ही कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से कंट्रोल होता है। एक रोबोट मशीन एक मिमी के भी गैप में सटीकता के साथ काम कर सकता है, जबकि एक डॉक्टर की सीमा 10 मिमी. तक ही होती है। 
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