लकवा,सेरेब्रल पाल्सी,रीढ़ की हड्डी की चोट के कारण हाथ-पैरों के बेकार होने से लाचार जिंदगी जी रहे मरीजों के लिए आशा की किरण दिखी है। डॉ.राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ऐसे मरीजों की फिजियोथेरेपी के लिए एक रोबोट स्थापित कर रहा है।
जिससे मरीज के लकवाग्रस्त अंग की फिजियोथेरेपी हो सकेगी। इसके साथ ही रोबोट की मदद से उसे चलाया-फिराया भी जाएगा। लगभग 2.5 करोड़ की कीमत का ये रोबोट एक पखवारे के अंदर इंस्टीट्यूट को मिल जाएगा।
डॉ.राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरएमएलआईएमएस) के डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबलिटेशन विभाग में रोबोटिक गेट ट्रेनर लगाया जा रहा है। ऐसे मरीज जिनके सिर में चोट,सेरेब्रल पाल्सी,चलने-फिरने में पैदाइशी दिक्कत,रीढ़ की हड्डी की चोट के कारण लकवा मार जाता है,उनकी फिजियोथेरेपी की व्यवस्था होती है।
इस मशीन से लकवा ग्रस्त अंग को चलाया जाता है। इससे मरीज को अचानक इलाज से उठने के बाद सुरक्षित तरीके से चलने में सहायता मिलती है। रोबोट मरीज को सही तरीके से कदम रखने में भी मदद करता है। इससे मांसपेशियों को भी ताकत मिलती है और शरीर का बैलेंस बनाने में मदद मिलती है। लगातार ट्रेनिंग से मरीज के पुनर्वास में सहायता होती है।