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फिजियोथेरेपिस्ट नहीं अब रोबोट कराएगा मरीजों को एक्सराइज

Sun, 05 Jul 2015 04:11 PM IST
अमित यादव/अमर उजाला,लखनऊ
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लकवा,सेरेब्रल पाल्सी,रीढ़ की हड्डी की चोट के कारण हाथ-पैरों के बेकार होने से लाचार जिंदगी जी रहे मरीजों के लिए आशा की किरण दिखी है। डॉ.राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ऐसे मरीजों की फिजियोथेरेपी के लिए एक रोबोट स्थापित कर रहा है।
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जिससे मरीज के लकवाग्रस्त अंग की फिजियोथेरेपी हो सकेगी। इसके साथ ही रोबोट की मदद से उसे चलाया-फिराया भी जाएगा। लगभग 2.5 करोड़ की कीमत का ये रोबोट एक पखवारे के अंदर इंस्टीट्यूट को मिल जाएगा।

डॉ.राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरएमएलआईएमएस) के डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबलिटेशन विभाग में रोबोटिक गेट ट्रेनर लगाया जा रहा है। ऐसे मरीज जिनके सिर में चोट,सेरेब्रल पाल्सी,चलने-फिरने में पैदाइशी दिक्कत,रीढ़ की हड्डी की चोट के कारण लकवा मार जाता है,उनकी फिजियोथेरेपी की व्यवस्था होती है।
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इस मशीन से लकवा ग्रस्त अंग को चलाया जाता है। इससे मरीज को अचानक इलाज से उठने के बाद सुरक्षित तरीके से चलने में सहायता मिलती है। रोबोट मरीज को सही तरीके से कदम रखने में भी मदद करता है। इससे मांसपेशियों को भी ताकत मिलती है और शरीर का बैलेंस बनाने में मदद मिलती है। लगातार ट्रेनिंग से मरीज के पुनर्वास में सहायता होती है।
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मरीज के हिसाब से किया जाता है प्रोग्राम

रोबोटिक गेट ट्रेनर को मरीज की जरूरत के अनुसार प्रोग्राम किया जाता है। यदि मरीज के दोनों पैर कार्य नहीं करते हैं तो उसकी अलग प्रोग्रामिंग होती है। यदि एक ही पैर या हिस्सा बेकार होता है तो उसकी अलग प्रोग्रामिंग की जाती है।

ट्रेनिंग के दौरान मरीज की मांसपेशियों और शरीर में आने वाले बदलावों पर विशेष सॉफ्टवेयर नजर रखता है उससे संबंधित डाटा इकठ्ठा करता है। इससे मरीज के ट्रेनिंग पैटर्न में बदलाव कर उसे जल्दी ठीक किया जा सकता है।

रोबोट की मदद से शिथिल पड़े अंग को चलाया जाता है। इससे लंबे समय से शिथिल पड़े अंग के चलने से रक्त का संचार होता है और उनमें मजबूती आती है। उस अंग की मांसपेशियों में ताकत आती है। हड्डियां मजबूत होती हैं। इससे अंग धीरे-धीरे कार्य करने लगते हैं।

रोबोट गेट ट्रेनर 20 जुलाई तक संस्थान को मिल जाएगा। अभी तक इस तरह का रोबोट सिर्फ रिम्स सैफई के पास है। प्रदेश में आरएमएलआईएमएस दूसरा संस्थान है जहां किसी बीमारी के कारण शारीरिक अक्षमता के मरीजों को रोबोट से फिजियोथेरेपी की व्यवस्था होगी।
प्रो. नुजहत हुसैन, निदेशक,आरएमएलआईएमएस
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