सूबे में कहीं भी ऐसी सड़क पर टोल टैक्स नहीं वसूला जा रहा है, जिसके निर्माण या मरम्मत की लागत निकल गई हो।
यह दावा है एनएचएआई (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के क्षेत्रीय अधिकारी कर्नल खुशवंत सिंह का। इसकी वजह ज्यादातर निर्माण प्रोजेक्ट्स पिछले तीन से चार बरसों में पूरे हुए हैं।
सूबे में 47 जगहों पर टोल टैक्स वसूला जा रहा है। कर्नल खुशवंत सिंह ने बताया कि यूपी में चार बड़े कॉरिडोर हैं।
पहला, दिल्ली-गाजियाबाद-हापुड़-मुरादाबाद-बरेली-लखनऊ-कानपुर-फैजाबाद, गोरखपुर-बिहार बॉर्डर।
दूसरा, दिल्ली-गाजियाबाद-अलीगढ़-कानपुर-लखनऊ-इलाहाबाद-वाराणसी। तीसरा, दिल्ली-आगरा-इटावा-कानपुर-चिकेरी- इलाहाबाद। चौथा, यूपी-एमपी बॉर्डर-शिवपुरी-कानपुर-लखनऊ।
इन राजमार्गों के कुछ हिस्सों का निर्माण वर्ष 2010 तक पूरा हुआ है और कुछ का निर्माण अभी चल रहा है।
जिनका निर्माण वर्ष 2010 में पूरा हो चुका है, वहां अगले 18-20 बरसों के लिए टोल टैक्स वसूलने का अधिकार निर्माण करने वाली फर्मों को दिया गया है।
लखनऊ-कानपुर सरीखी कुछ सड़कों के मेंटेनेंस के एवज में अगले 8-9 साल तक टोल टैक्स वसूलने का अधिकार दिया गया है।
यानी, जहां सड़कों के निर्माण की लागत निकल चुकी है, वहां ऑपरेट, मेंटेन एंड ट्रांसफर मोड में टोल का ठेका दिया गया है।
कर्नल खुशवंत सिंह ने बताया कि प्रदेश में विभिन्न राजमार्गों पर 47 स्थानों पर टोल टैक्स प्लाजा स्थापित किए गए हैं।