मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बच्चों के लिए उपयोगी पल्स ऑक्सीमीटर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए। हमारी एमएसएमई इकाइयां, चाइल्ड पल्स ऑक्सीमीटर के विनिर्माण की दिशा में अच्छा सहयोग कर सकती हैं। संबंधित विभाग द्वारा एमएसएमई इकाइयों से संपर्क कर इस दिशा में प्रयास शुरू किए जाएं।
उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ माह बच्चों के स्वास्थ्य के दृष्टिगत संवेदनशील हैं। बरसात का मौसम शुरू हो रहा है। संचारी रोग, डेंगू, इंसेफेलाइटिस, चिकनगुनिया आदि की समस्या बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों ने कोविड की तीसरी लहर की आशंका भी जताई है। ऐसे में बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए सभी जरूरी प्रबंध किए जा रहे हैं। अभिभावकों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।इंसेफेलाइटिस रोकथाम के लिए 'दस्तक' अभियान के साथ-साथ संचारी रोगों से बचाव के लिए विशेष जागरूकता अभियान संचालित किए जाएं।
उन्होंने कहा कि कोविड -19 की संभावित तीसरी लहर से बचाव के लिए सभी जरूरी प्रबंध किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए घर-घर मेडिकल किट वितरण का विशेष कार्यक्रम मंगलवार से प्रारंभ किया गया है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। जिलों में प्रभारी मंत्रीगणों द्वारा निगरानी समितियों को दवाई-किट प्रदान कराया जाए। निगरानी समितियां जब दवाई-किट दें तो लाभार्थी का नाम-पता फोन नंबर आदि विवरण भी प्राप्त करें। सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से लाभार्थियों से संपर्क कर बच्चों की सेहत की जानकारी ली जाए
बच्चों के लिए घर-घर मेडिकल किट वितरण का विशेष अभियान सुचारू रूप से संचालित किया जाए। पहले 50 लाख से अधिक बच्चों को निःशुल्क दवाई किट वितरित की जाएगी। 18 वर्ष से कम आयु के कोविड-19 के लक्षण युक्त बच्चों को चार वर्गों (0-1 वर्ष, 1-5 वर्ष, 5-12 वर्ष तथा 12-18 वर्ष) में विभाजित किया गया है। प्रत्येक वर्ग हेतु अलग-अलग प्रकार की दवाई किट तैयार की गई है।
प्रदेश में कोविड संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में है। स्थिति सामान्य हो रही है, लेकिन हमें यह समझना होगा कि वायरस कमजोर हुआ है, खत्म नहीं हुआ। संक्रमण कम हुआ है, पर जरा सी लापरवाही संक्रमण को फिर बढ़ा सकती है। सभी लोग मास्क, सैनिटाइजेशन, सोशल डिस्टेंसिंग जैसे कोविड बचाव के व्यवहार को जीवनशैली में शामिल करें। बहुत जरूरी हो तभी घर से बाहर निकलें। भीड़ से बचें। पुलिस बल सक्रिय रहे।
सभी मेडिकल कॉलेजों में 100-100 बेड के पीआईसीयू स्थापित किये जाने की कार्रवाई तेजी से पूरी की जाए। इसके साथ 50 बेड का एनआईसीयू भी हों। इसी तरह जिला अस्पताल और सीएचसी स्तर पर भी मिनी पीकू स्थापित किए जा रहे हैं। प्रभारी मंत्रीगणों द्वारा इसका निरीक्षण किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में एक्सप्रेस-वे के निर्माण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। दुर्घटना के दौरान घायलों को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध क राने के लिए एक्सप्रेस-वे के किनारे ट्रॉमा सेंटर की आवश्यकता है। सबसे पहले लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर एक सभी सुविधा से लैस ट्रॉमा सेंटर की स्थापना कराई जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य एक्सप्रेस-वे पर भी ट्रॉमा सेंटर बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अफसरों को निर्देश दिया कि इसकी कार्ययोजना बनाकर जल्द से जल्द प्रक्रिया शुरू कराई जाए।
जब तक किसान आएं तब तक गेहूं खरीदें
सीएम ने कहा कि गेहूं खरीद 15 जून के बाद एक सप्ताह के लिए और बढ़ाया जाए। क्रय केंद्रों को चरणबद्ध रूप से बंद किया जाए। जहां किसान आएं वहां खरीद जारी रखी जाए। जब तक किसान आएंगे गेहूं खरीद जारी रहेगी। इन व्यवस्थाओं की हर दिन मॉनिटरिंग करें।