पुराने शहर के तनावपूर्ण माहौल के बारे में पूछने पर पर मंजूर कहते हैं कि अखबारों में पढ़ते तो हैं, लेकिन डर नहीं लगता। यहां इस इलाके में पुलिसिया सक्रियता इतनी है कि सबकुछ सामान्य लगता है। नया शहर हर गुजरते साल के साथ बदलता जा रहा है।
तीन-चार सालों से यहां साथियों संग आ रहे मंजूर ने बताया कि कश्मीर से 12-14 लोगों का दल आया है, कुछ लोग रोज यहीं बैठे हैं तो कई डालीगंज पुल के आसपास मेवे की रेड़ी लगाते हैं। साथ आए सब्जाद ने बताया कि पुलिस भी तंग नहीं करती, हां कभी कभार वीआईपी मूवमेंट होता है या एसएनए मोड़ की तरफ अगर ट्रैफिक बढ़ता है तो दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ता है। सब्जाद ने बताया कि कुछेक दिनों में इलाके के और भी लोग यहां गर्म ऊनी कपड़े बेचने पहुंचेंगे।