मां, मेरा लाल तो तुम्हारा भक्त था। नवरात्र के पहले दिन तुम्हारे दर्शन करने की कामना लेकर घर से निकला था। ऐसी क्या गलती हो गई मां जो मेरे सहारे को अपने पास ही बुला लिया। यह कहते-कहते संतोष लोधी के पिता जगदीश का गला भर्रा गया और वह फूट-फूटकर रोने लगे। उनके आंसुओं ने सबकी आंखें नम कर दीं। पीलीभीत हादसे में जान गंवाने वाले संतोष के पिता रो-रोकर बेहाल थे तो दूसरी तरफ संतोष की पत्नी ममता और बच्चों की हिचकियां थमने का नाम नहीं ले रही थीं।
संतोष यहां गोमतीनगर विस्तार के मकदूमपुर में रहकर पेंटिंग का काम करता था। उसके चाचा छोटेलाल ने बताया कि वह माता का भक्त था। शनिवार से नवरात्र शुरू होने पर वह पहले ही दिन मां पूर्णागिरी के दर्शन के लिए उतावला था। शुक्रवार रात वह दर्शन के लिए घर से निकला और बस में बैठ गया। उसने फोन कर पत्नी ममता से बातचीत की थी। बोला था, माता के दर्शन करके रात तक ही लौट आएगा। शनिवार दोपहर फोन पर उसकी हादसे में मौत की खबर मिली तो परिवारीजनों में कोहराम मच गया। ममता बेहोश होकर गिर पड़ीं। पिता जगदीश और परिवार के अन्य सदस्यों को जैसे सदमा लग गया। छोटेलाल ने बताया कि संतोष के एक बेटा व एक बेटी है। उसकी मौत की खबर से मकदूमपुर इलाके में शोक का माहौल छा गया।
संतोष के अलावा गोमतीनगर विस्तार में ही किराये पर रहने वाले 28 वर्षीय विनोद की भी उक्त हादसे में मौत हो गई थी। विनोद मूलरूप से बाराबंकी के रामसनेहीघाट का रहने वाला था और यहां किराये पर रहकर संविदा पर सफाईकर्मी की नौकरी करता था। विनोद के गांव के हीरालाल यादव ने बताया कि उसके परिवार में पिता गया प्रसाद के अलावा बड़ा भाई प्रेमचंद्र और एक बहन है। मां की कई साल पहले मौत हो चुकी है। हाल ही में बहन की शादी हुई है। शुक्रवार रात करीब 10 बजे उसने चचेरे भाई को फोन करके मां पूर्णागिरी के दर्शन के लिए जाने की जानकारी दी थी। उसकी मौत की खबर से परिवारीजन सदमे में हैं।