सत्तारूढ़ भाजपा निकाय चुनाव में पंचायत चुनाव वाली चूक दोहराना नहीं चाहती है। इसीलिए महापौर और नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर आरक्षण की घोषणा नहीं हो सकी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अप्रैल-मई 2021 में हुए पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य एवं अध्यक्ष, क्षेत्र पंचायत सदस्य और अध्यक्ष के आरक्षण को लेकर जिला से लेकर प्रदेश तक विरोध हुआ था।
जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य के चुनाव में पार्टी की हार क लिए आरक्षण के गलत निर्धारण को भी जिम्मेदार ठहराया गया था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी उस समय पंचायती राज मंत्री थे। पार्टी सूत्रों का कहना था कि नेतृत्व पंचायत चुनाव में हुई चूक को निकाय चुनाव में नहीं दोहराना चाहता है लिहाजा प्रमुख निकायों में एक-एक कदम सोच-समझकर आगे बढ़ाया जा रहा है।
शर्मा को पहले से किया था आगाह
निकाय चुनाव के लिए पिछले महीने भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित बैठक में नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा को आरक्षण निर्धारण को लेकर आगाह किया गया था। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और महामंत्री संगठन की मौजूदगी में पदाधिकारियों ने साफ कहा था कि आरक्षण का निर्धारण पार्टी की मंशा के अनुरूप होना चाहिए। हालांकि शर्मा ने बैठक में भी कहा था कि आरक्षण नियमानुसार चक्रानुक्रम में ही तय होगा, संगठन उस पर आपत्ति भी कर सकता है।