मेट्रो के लिए भूमि अधिग्रहण का आगाज जल्द ही होगा। भूमि अर्जन के लिए मुआवजा भी नए कानून के हिसाब से दिया जाएगा। वहीं जो लोग मुआवजा नहीं लेना चाहते हैं, उनके लिए अतिरिक्त ऊंचाई (एफएआर) का विकल्प होगा।
जबकि सरकारी क्षेत्र की भूमि नि:शुल्क लेने के लिए कैबिनेट से अप्रूवल लिया जाएगा। मेट्रो से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक जिसकी भी भूमि इस प्रयोजन के लिए ली जाएगी, उसको निराशा नहीं होगी।
सर्वे में 20 निजी निर्माण और 9 बड़े सरकारी निर्माण मेट्रो कॉरिडोर से 30 मीटर की जद में आ रहे हैं। सुकून की बात यह है कि अधिकांश इमारतों के आगे खाली स्थान है। ऐसे में बहुत अधिक तोड़फोड़ की जरूरत नहीं होगी।
अमौसी से मुंशी पुलिया के 23 किलोमीटर लंबे रूट पर मेट्रो के संचालन और निर्माण के लिए एलएमआरसी को करीब 48 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ेगी।
इसमें स्थाई और अस्थाई दोनों ही तरह की जमीन की जरूरत होगी। यह जमीन सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों से ही ली जाएगी।
करीब 11 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण निजी क्षेत्र से करना पड़ेगा। स्थाई जरूरत के तौर पर नार्थ साउथ कॉरिडोर में स्टेशन के लिए सरकारी क्षेत्र से 1.83 हेक्टर और प्राइवेट से 2.02 हेक्टयेर जमीन की जरूरत पड़ेगी।
रनिंग सेक्शन के लिए सरकार से 1.05 और प्राइवेट से 3.68 हेक्टयेर जमीन चाहिए होगी। सब स्टेशन और अन्य जरूरतों के लिए सरकारी क्षेत्र से 37.8 हेक्टयेर जमीन ली जाएगी। सबसे पहले अर्जन की कवायद अमौसी से आलमबाग के बीच की जाएगी।
मार्केट रेट के दुगने मुआवजे की तैयारी
भूमि अर्जन की व्यवस्था ऐसे की जाएगी जिससे अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।
लोगों को एक जनवरी से लागू किए जा चुके नए भूमि अर्जन अधिनियम के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा। एलएमआरसी के अधिकारियों के मुताबिक लोगों को मार्केट रेट का दोगुना मुआवजा दिया जाएगा।