बच्चों और किशोरों की ट्रॉमा में होने वाली मौतों में सबसे बड़ी वजह रोड ट्रैफिक एक्सीडेंट है। इसके बाद दम घुटने और यौन अपराधों से सर्वाधिक मौतें हुई हैं। ये खुलासा लखनऊ के केजीएमयू के फॉरेंसिक साइंस विभाग और पैथालॉजी विभाग ने छह वर्ष में ट्रॉमा सेंटर में हुई साढ़े तीन हजार मौतों पर किए अध्ययन के बाद किया है।
इसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि सबसे अधिक मौतें लड़कियों और बच्चियों की हुई, जिनमें करीब साढ़े छह सौ मौतें यौन अपराधों की शिकार होने की वजह से हुई। केजीएमयू के इन दोनों विभागों के रिसर्च के अनुसार इन छह वर्षों में 18 साल तक की उम्र के 9,160 बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम किया गया, जिनमें से 7,747 बच्चों की मौत ट्रॉमा से संबंधित कारणों से हुई थी।
इसमें लड़कियों की संख्या ज्यादा थी और लड़कियां व लड़कों का अनुपात 1.3:1 रहा। अध्ययन कर्ताओं के अनुसार इसकी प्रमुख वजह उनके साथ होने वाले दुराचार भी रहे। इन बच्चों की मौतों में 65.8 प्रतिशत की उम्र 10 से 18 वर्ष थी, इनमें भी अधिकतर संख्या किशोरियों की थी। अध्ययन में फॉरेंसिक के डॉ. अनूप वर्मा और पैथालॉजी से डॉ. सचिल कुमार शामिल थे।
61 प्रतिशत ने मौके पर ही दम तोड़
इन मौतों में से 4,725 बच्चों की मौत घटनास्थल पर ही हो चुकी थी और अस्पतालों में इन्हें मृत लाया गया। यह आंकड़ा 61 प्रतिशत है। वहीं 5.6 प्रतिशत ने अस्पताल पहुंचने के बाद दम तोड़ा, 26.2 प्रतिशत की मौत इलाज के 24 घंटे के दौरान ही हो चुकी थी।