उन्हें पीने-पिलाने का शौक है, पार्टी देना उनका शगल है लेकिन जिम्मेदारी दे दी शराब का बढ़ता चलन रोकने की।
एक अन्य नेता ने सड़कों पर व्यापारियों की लड़ाई लड़ी, अब वे संस्कृति के संरक्षण में योगदान करेंगे। पसमांदा मुसलमानों के हकों के लिए संघर्ष करने वाले होमगार्डों की निगरानी करेंगे।
इसी तरह आर्यसमाजी परिवार से ताल्लुक रखने वाले को मंदिरों, मूर्तियों के रख-रखाव और विकास का जिम्मा मिला है।
लालबत्ती बांटने के सपा सरकार के कई अजब-गजब फैसलों पर इसलिए भी अंगुली उठ रही है कि नेताओं को उनकी योग्यता और प्रोफाइल के मुताबिक काम नहीं सौंपा गया।
ऐसा लग रहा है कि लालबत्ती और राज्यमंत्री का दर्जा उन्हें उपकृत कर रसूख बढ़ाने के लिए दिया गया है। जिम्मेदारी देते समय उनकी योग्यता या विशेषज्ञता को ध्यान में नहीं रखा गया।
लोकसभा चुनाव नजदीक होने का असर कहिए या चुनावी समीकरण साधने की कोशिश, सपा सरकार ने लालबत्ती बांटने में बड़ी उदारता दिखाई है।
एक दर्जन से ज्यादा लोगों को तो निगमों, बोर्डों में चेयरमैन या सलाहकार बनाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। 80 से ज्यादा नेताओं को राज्यमंत्री का स्टेटस दिया गया है।
एक विभाग के चेयरमैन तो अक्सर सूबे से बाहर ही रहते हैं। उनका ऑफिस आना यदा-कदा ही होता है। वीआरएस लेकर सपा में शामिल होने वाले विवादित आईएएस अधिकारी सीधे कैबिनेट मंत्री का दर्जा पा गए।
सपा में चर्चा है कि पार्टी नेता सीपी राय को मद्य निषेध विभाग रास नहीं आ रहा है। पूरे प्रदेश में इस विभाग का ढांचा तक नहीं है।
साइंस एंड टेक्नोलॉजी बोर्ड की अध्यक्ष पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री अनुराधा चौधरी का भी कम ही ऑफिस आती हैं।
पॉलिटिकल साइंस में पीएचडी उपाधि धारक नेता को रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर जैसे हाईटेक विभाग में चेयरमैन बनाया गया है तो व्यापारी नेता को संस्कृति विभाग का।
आजम के विभाग में दखल नहीं
सपा ने जिस विभाग में चाहा, सपा नेताओं को लालबत्तियां दे दीं लेकिन नगर विकास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम खां के विभागों में दखल नहीं दिया गया।
आजम की सहमति के बिना अनीस मंसूरी को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सलाहकार बना दिया गया था। इस पर आजम खां ने नाराजगी जताई।
इसके बाद अनीस को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से हटाकर होमगार्ड विभाग में सलाहकार बनाया दिया गया।
सुरभि शुक्ला 24 घंटे में हटीं
सुरभि शुक्ला को एक जनवरी 2013 को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की चेयरमैन बनाई गई थीं, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही हटा दी गईं।
बाद में उन्हें महिला आयोग में उपाध्यक्ष बनाया गया। अब इसी माह फिर उन्हें राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद का चेयरमैन बनाया गया है।
हिस्ट्रीशीटर्स को भी लालबत्ती से नवाजा
कुछ ऐसे सपा नेता भी लालबत्ती पाने में कामयाब रहे हैं जिनकी हिस्ट्रीशीट खुली हुई है। ऐसे नेताओं को राज्यमंत्री का दर्जा देने पर कुछ लोगों ने आपत्ति भी जताई लेकिन उसकी अनसुनी कर दी गई। ऐसे नेताओं में पश्चिमी और मध्य यूपी से ताल्लुक रखने वाले दो नेताओं के नाम चर्चा में हैं।