अतीक के शक्ति प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की नाराजगी को आला अफसरों ने नजरअंदाज कर दिया है।
सीएम के रवैये के विपरीत अफसर इस प्रकरण को दबाने में लगे हैं।
यह इसी से साबित होता है कि सपा के लोकसभा प्रत्याशी अतीक अहमद की 15 दिसंबर को हुई विवादित सभा निषेधाज्ञा के दौरान हुई।
अपर जिलाधिकारी अरविंद पांडेय का कहना है कि मोहर्रम के लिए लगाई गई निषेधाज्ञा 17 दिसंबर तक जारी थी जबकि सरकारी प्रवक्ता की हैसियत से आईजी एसटीएफ आशीष गुप्ता ने कहा था कि अतीक की सभा के दौरान वहां निषेधाज्ञा नहीं लागू थी।
अतीक करीब दो सौ गाड़ियों के काफिले और असलहे के साथ सुल्तानपुर पहुंचे थे। बड़बोलापन दिखाते हुए उन्होंने कहा था कि विरोधी प्रत्याशी की जितनी उम्र है, उससे ज्यादा तो मेरे ऊपर मुकदमे हैं।
उनके इस तेवर और लाव लश्कर पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद अफसरों ने जिले के एसपी से रिपोर्ट तलब करने का दावा किया था।
यह भी कहा गया था कि सुल्तानपुर के एसपी दो दिन में अपनी रिपोर्ट दे देंगे। दावों के विपरीत आला अफसरों ने सुल्तानपुर के कप्तान को मामले की जांच कर रिपोर्ट भेजने के लिए तीन दिन बाद ही लेटर भेजा।
बहरहाल, जिले में निषेधाज्ञा लागू होने के बाद भी अतीक अहमद की सभा में असलहों की नुमाइश पर रिपोर्ट मांगने से पुलिस महकमे में खलबली मची है।
अपर जिलाधिकारी अरविंद पांडेय ने बताया कि निषेधाज्ञा को देखते हुए सपा प्रत्याशी की सभा के लिए एसडीएम सदर एसएन सिंह से अनुमति भी मांगी गई थी लेकिन उसमें पुलिस रिपोर्ट नहीं होने से उप जिलाधिकारी ने अनुमति देने से इन्कार कर दिया था।
उधर, अपर पुलिस अधीक्षक डीपीएन पांडेय ने कहा कि जांच में सपा प्रत्याशी की सभा में सिर्फ तीन असलहों का जिक्र है। जल्द ही रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक किरण एस ने एएसपी को सौंपी है। बकौल एसपी सुल्तानपुर जिस दिन अतीक यहां आए थे, उस दिन सिपाही भर्ती परीक्षा भी थी।
अत: विभिन्न स्थानों पर पुलिस तैनात की गई थी। जिस मार्ग से अतीक और उनके समर्थक आए अब वहां तैनात पुलिसकर्मियों के बयान लेकर रिपोर्ट भेजी जाएगी।