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आईएएस एसपी सिंह ने जनता की नब्ज भांपकर चला दांव

Sat, 25 Jul 2015 02:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने सरकारी कार्रवाई की सुगबुगाहट के बीच स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) का जो दांव चला उसकी अलग-अलग तरह से व्याख्या शुरू हो गई है। कोई इसे शुद्ध राजनीतिक महत्वाकांक्षा से जोड़ रहा है तो कोई इसे साहस के साथ सरकार को आईना दिखाने वाला बता रहा है।
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जो भी हो एसपी सिंह इस वीआरएस दांव के बाद सोशल मीडिया में छा गए हैं। लोगों की नजरें अब सरकार पर टिकी हैं, जो बार-बार कार्रवाई के संकेत के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर पाई। सरकार को वीआरएस के ऐसे पत्र पर फैसला करना है जिसमें ऐसे मुददों की भरमार है जिस पर वह जनता से लेकर न्यायालय तक के बीच पहले से ही कठघरे में है।

1982 बैच के आईएएस अफसर डॉ. सिंह की सरकार से चकचक तभी शुरू हो गई थी जब उन्हें अचानक अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के प्रमुख सचिव के पद से हटा दिया गया था। यह तल्खी और बढ़ गई जब कुछ ही दिनों के भीतर उनके कई बार तबादले किए गए।
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माध्यमिक शिक्षा विभाग से हटाए जाने के बाद उन्होंने मोर्चा ही खोल दिया। एक एनजीओ के बैनर तले उन्होंने उन-उन मुद्दों पर सरकार पर सवाल खडे करने शुरू किए, जिन पर वह पहले से ही जनता के बीच कठघरे में होती।
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इन मुद्दों पर सरकार को घेरा

बोर्ड परीक्षा में नकल और उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग में नियुक्तियों में मनमानी व अध्यक्ष अनिल यादव की कार्यशैली के खिलाफ वह जनता के साथ खड़े हो गए। बिजली दरों में बढ़ोतरी, नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस के मुख्य अभियंता रहे यादव सिंह के खिलाफ कार्रवाई की जगह बचाने की कोशिश, चीनी मिलों की बिक्री में अनियमितताओं के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई को दबाने व बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि पीड़ित किसानों के साथ गन्ना बकाये के मुद्दे पर सोशल मीडिया में मुखर होकर अभियान चलाया।

इस बीच कई बार यह हवा उड़ी की सरकार उनके खिलाफ कभी भी कार्रवाई कर सकती है। एक समीक्षा बैठक बुलाकर फिर उसे स्थगित करने के बाद तो उन्होंने सीधे सीएम व मुख्य सचिव पर निशाना साधा। पर, कार्रवाई की बात हर बार हवा ही साबित हुई।

डॉ. सिंह इसी साल 31 दिसंबर को अपनी सेवा पूरी कर रहे हैं। सरकार उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करती उसके पहले ही उन्होंने मुश्किल में डालने वाले बहुप्रचारित मुद्दों के साथ वीआरएस की अर्जी दे दी।

जानकार बताते हैं कि मुद्दों के साथ दी गई अर्जी स्वीकार करना एक तरह से आरोपों को स्वीकार कर लेना होगा। अब नजर इसी बात पर है कि सरकार वीआरएस के पत्र पर क्या फैसला करती है। दूसरा, क्या सरकार इसके बाद भी डॉ. सिंह के खिलाफ  कार्रवाई करेगी, जिससे वह अब तक बचती आई है?

फेसबुक वॉल पर इन मुददों पर लिखते-लिखते वीआरएस

- प्रदेश में नकल के लिए दागी करार दिए गए स्कूलों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया तो माध्यमिक शिक्षा विभाग से हटा दिए गए। बाद में बोर्ड परीक्षाओं में नकल को मुद्दा बनाकर नकल रोको अभियान चलाया।

- ओलावृष्टि व बेमौसम बारिश से फसलें बर्बाद हुईं तो उन्होंने किसानों के नुकसान और क्षतिपूर्ति का मामला उठाया। पिछले साल के सूखा राहत का पैसा केंद्र से मिलने के बाद भी महीनों तक न बंटने और गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मामला उठाया।

- बिजली की दरें बढ़ाए जाने पर सवाल उठाया। बिजली निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार व वीआईपी जिलों में बिजली चोरी का विश्लेषण कर चोट की।

- उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष अनिल यादव के खिलाफ  आंदोलन में शामिल होने इलाहाबाद पहुंच गए। भर्ती परीक्षाओं में जातिवाद व भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। पिछड़ी जाति के 27 प्रतिशत कोटे में 21 प्रतिशत पद एक ही जाति के व एक ही क्षेत्र के लोगों को भरने से युवाओं में बढ़ते आक्रोश पर मुखर हुए।
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पत्रकार व महिला को जलाने पर भी उठाए सवाल

- शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत और बाराबंकी में एक पत्रकार की मां के साथ थाने में बलात्कार की कोशिश व मौत के मामले में सरकारी रवैये की खुलकर मुखालफत की। मीडिया की चुप्पी पर भी सवाल उठाया।

- आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर छह शक की सुइयां उठाईं। दावा किया कि यह एक्सप्रेस-वे एक वीआईपी गांव, भू-माफिया और रियल एस्टेट एजेंट्स को लाभ पहुंचाने के लिए लाया गया।

- सड़कों के निर्माण में भेदभाव और चुनिंदा जिलों व गांवों में ज्यादातर बजट का उपयोग किए जाने का मसला उठाया।

- नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यूपीएसआईडीसी में राजनेताओं व अफसरशाही की मिलीभगत पर सवाल उठाया। कहा-इससे यादव सिंह जैसे नवधनाड्य जरूर पैदा होंगे लेकिन निवेश नहीं आएगा। आम जनता का कोई फायदा नहीं होगा।

- यमुना एक्सप्रेस-वे में 1,86,000 करोड़ रुपये का सरकार का नुकसान हुआ। कुछ प्रभावशाली नेताओं व नौकरशाहों के फंसे होने के कारण कार्रवाई न होने पर टिप्पणी की। सीबीआई जांच के लंबित मुददे को उठाया।

-शुगर कॉरपोरेशन की चीनी मिलों को औने-पौने दाम में बेचे जाने और 400-500 करोड़ की परिसंपत्ति को 6-10 करोड़ में निजी स्वार्थ में बेचने का आरोप लगाया। सीबीआई जांच की मांग उठाई।
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