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'टीम अखिलेश' को दिये सोशल मीडिया पर छा जाने के ये टिप्स

Sat, 25 Jul 2015 02:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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टिप्स-1: यदि कहीं विदेशी महिला की रेप के बाद हत्या हो जाए तो सपा नेता के तौर पर सरकार का बचाव करते समय बिल्कुल आक्रामक मत होइए। घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताएं, दूसरे लोगों से सहमत होते हुए हुए उसकी निंदा करिये। बताइये कि किस तरह पुलिस सक्रिय हुई है, दोषी जल्द गिरफ्तार होंगे। आपका व्यवहार ऐसा होना चाहिए जिससे जनता को लगे कि सपा संवेदनशील लोगों की पार्टी है।
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टिप्स-2: देश में मतदान करने वाले कुल 39 करोड़ वोटरों में लगभग नौ करोड़ सोशल मीडिया से जुड़े हैं। ये ओपिनियन बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। किसी भी चुनाव में इनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। नरेंद्र मोदी ने 2009 में सोशल मीडिया का इस्तेमाल शुरू किया और 2014 में सरकार बनाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। आपके पास अपने खिलाफ अभियान की काट करने और दूसरों पर हमलावर होने वाली टीम होनी चाहिए।

टिप्स-3: कहीं दंगा हो जाए तो पार्टी का पक्ष रखते समय दंगों के लिए किसी को आरोपित न करें। कोशिश करें कि एक सवाल को दूसरे सवाल से टाल दें। यदि दूसरे लोग रिएक्शन देते समय मौजूद हैं तो उनसे उलझें नहीं। अपनी बात धैर्य और संयम से रखें। उकसावे वाली बातों से बचें।
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माना जा रहा है मिशन 2017 की रणनीति का हिस्‍सा

ये टिप्स किसी एजेंसी, सियासी दल या सरकार की एडवाइजरी का हिस्सा नहीं, बल्कि सपा के नेताओं को दिल्ली में एक कार्यशाला में पॉलिटिकल और मीडिया मैनेजमेंट के गुर सिखाने के लिए दिए गए। इसे मिशन 2017 की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।

20 विशेषज्ञों की टीम ने दो दिनों तक सपा नेताओं खासतौर से युवा टीम को संवेदनशील मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखने, सोशल मीडिया पर ओपिनियन मेकिंग, प्रचार प्रबंधन कैसे बेहतर तरीके से किया जा सकता है उसके तरीके सिखाए।

सपा ने विधानसभा में हारी हुई सीटों पर प्रत्याशियों के चयन की कसरत शुरू कर दी है। बूथ स्तर पर कमेटियां बनाई जा रही हैं। एक से 14 अगस्त तक कार्यकर्ता प्रदेश में साइकिल यात्राएं निकालकर सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों का प्रचार करेंगे। इसी के साथ विपक्षी दलों का जवाब देने और 2017 की जंग लड़ने के लिए ट्रेंड नेताओं की टीम तैयार करने में जुट गई है।

इसी के तहत कार्यशाला में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, गाजियाबाद, इलाहाबाद समेत प्रदेश के सभी क्षेत्रों से जुड़े चुनिंदा नेताओं, खासतौर से युवाओं को शामिल किया गया। विधान परिषद सदस्य मधु गुप्ता और दर्जा प्राप्त पूर्व मंत्री सीपी राय को छोड़ दें तो ज्यादातर प्रतिभागी सीएम अखिलेश यादव की युवा टीम से थे।

युवा नेता इस पर बोलने को तैयार नहीं

कार्यशाला में शामिल रहे युवा नेताओं का कहना है कि यह तो शुरुआत है। 2017 से पहले सपा के प्रमुख नेताओं को काफी हद तक ट्रेंड कर दिया जाएगा। आने वाले दिनों में इस तरह की और भी कार्यशालाएं होंगी।

सपा नेतृत्व चाहता है कि राजनीतिक, मीडिया, सोशल मीडिया प्रबंधन की तैयारियां गोपनीय तरीके से चलें। इसलिए युवा नेता इस पर अधिकृत तौर पर बोलने को तैयार नहीं हैं।

अलग-अलग मुद्दों पर कराई बहस
प्रतिभागियों को अलग-अलग दलों के नुमाइंदों के रूप में बांटकर टीवी चैनल की तरह अलग-अलग विषयों पर बहस कराई गई। संवेदनशील मुद्दों पर पांच से दस मिनट में पार्टी का पक्ष लिखने को कहा गया।

विशेषज्ञों ने खुद पक्ष रखकर बताया कि किन मुद्दों पर कैसे सरकार का बचाव करना है। कानून व्यवस्था से जुड़े सवालों को कैसे हैंडल करना है, इसे लेकर प्रैक्टिकल और थ्योरिटिकल जानकारियां दी गईं।

सरकार का पक्ष रखने के भी गुर सिखाए
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव द्वारा टेलीफोन पर आईपीएस अधिकारी को फोन पर धमकी देने, विदेशी महिला से बलात्कार के बाद हत्या, सांप्रदायिक दंगा और बड़ी आपराधिक घटनाओं को केस के रूप में लेकर उन पर सपा और सरकार के बचाव पर चर्चा कराई गई।

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सोशल मीडिया की अहम भूमिका

विशेषज्ञों ने बताया कि सोशल मीडिया के बेहतर इस्तेमाल के भी टिप्स दिए। विशेषज्ञों ने कहा, राजनीति में इसका सबसे अच्छा इस्तेमाल नरेंद्र मोदी ने किया है। गुजरात का मुख्यमंत्री रहते देश में मीडिया के बड़े वर्ग में मोदी की इमेज बहुत अच्छी नहीं थी। पर, सोशल मीडिया पर उन्होंने अपने पक्ष में लिखवाना शुरू किया।

उनके पक्ष में इतना प्रचार हुआ कि विरोधियों को भी उनकी लोकप्रियता को मानना पड़ा। विशेषज्ञों ने कहा कि बूथों पर जाकर वोट डालने वालों में एक तिहाई सोशल मीडिया से जुड़े हैं। उन्होंने आंकड़े देकर बताया कि सोशल मीडिया पर सपा, बसपा से भी पीछे हैं। उन्होंने बताया कि कैसे न्यू मीडिया का उपयोग किया जा सकता है?

एक क्लिक पर मिलेगा गांव स्तर का डाटा
सपा गांव स्तर के आंकड़ों का डाटा बैंक बनाने जा रही है। बूथ कमेटी के गठन के समय एक प्रपत्र पर जानकारी मांगी गई है कि गांव के जातीय समीकरण क्या हैं ? किसी जाति में कौन लोग प्रभावी हैं ? उनके मोबाइल नंबर क्या हैं?

ये सभी आंकड़े प्रदेश मुख्यालय पर आने के बाद कंप्यूटर में फीड कर दिए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर इस डाटा बैंक का इस्तेमाल किया जाएगा।
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