प्रदेश का महिला कल्याण विभाग इन दिनों भगवान भरोसे चल रहा है। इस विभाग में उच्च स्तर के अफसरों के नाम पर अब सिर्फ एक उपसचिव ही बचे हैं।
सचिवालय से लेकर निदेशालय तक के सभी उच्च पद खाली हो गए हैं। दरअसल, महिला कल्याण विभाग में प्रमुख सचिव का पद पहले से ही खाली था।
सचिव कामिनी रतन चौहान के भरोसे ही यह विभाग चल रहा था, लेकिन पिछले महीने उनका एक्सीडेंट हो गया था। तब से वे मेडिकल लीव पर हैं।
उनकी अनुपस्थिति में विशेष सचिव रमेश मिश्रा विभाग की बागडोर संभाले हुए थे, लेकिन पैर की हड्डी टूटने के कारण वे भी काफी दिनों से मेडिकल लीव पर चल रहे थे।
इसी बीच पिछले दिनों सरकार ने उन्हें डीएम बनाकर हरदोई भेज दिया। खास बात यह है कि विशेष सचिव का पद संभालने के साथ ही उनके पास निदेशक महिला कल्याण का भी पद था।
यही नहीं उत्तर प्रदेश महिला कल्याण निगम के प्रबंध निदेशक का पद भी रमेश मिश्रा ही संभाले हुए थे। ऐसे में उनके जाने के बाद यह पद भी खाली हो गया है।
नियुक्ति विभाग ने महिला कल्याण विभाग से विशेष सचिव तो हटा लिए, लेकिन यहां किसी दूसरे अधिकारी की अभी तक नियुक्ति नहीं की।
वहीं, सचिव महिला कल्याण पिछले एक महीने से मेडिकल लीव पर हैं और पूरे जून भर वे अवकाश पर ही रहेंगी।
ऐसे में विभाग का चार्ज किसी दूसरे अधिकारी को न दिया जाना भी यह दर्शाता है कि यह विभाग सरकार की प्राथमिकता में नहीं है।