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आंवला : भाजपा के गढ़ में दो विधायकों के बीच कड़ी टक्कर, अब तक हुए 17 चुनावों में सात बार भाजपा और पांच बार जीती कांग्रेस

Fri, 11 Feb 2022 05:45 AM IST
ishwar ashish अभिनय सिंह, अमर उजाला, बरेली

सार

आंवला सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। यहां अब तक हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सात बार जबकि कांग्रेस ने 5 बार जीत दर्ज की है। 1952 से ही अस्तित्व में आई आंवला विधानसभा सीट पर पहले तीन चुनाव में कांग्रेस के नवलकिशोर ने हैट्रिक लगाई।
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भाजपा: धर्मपाल सिंह, बसपा: लक्ष्मण प्रसाद लोधी, कांग्रेसः ओमवीर यादव, सपाः आरके शर्मा। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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आंवला विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प तो है ही, रोमांचक होने की दिशा में भी बढ़ता नजर आ है। भाजपा से मौजूदा विधायक धर्मपाल सिंह मैदान में उतरे हैं। वहीं बिल्सी से भाजपा से पिछला चुनाव जीते विधायक आरके शर्मा सपा से ताल ठोक रहे हैं। धर्मपाल सिंह चार बार, तो आरके शर्मा दो बार विधायक रह चुके हैं।

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1952 से ही अस्तित्व में आई आंवला विधानसभा सीट पर  पहले तीन चुनाव में कांग्रेस के नवलकिशोर ने हैट्रिक लगाई। 1967 में यहां से जनसंघ के डी. प्रकाश को जीत मिली, तो 1969 में कांग्रेस के केशोराम विधायक बने। 1974 में जनसंघ और फिर 1977 में जनता पार्टी से श्याम बिहारी सिंह ने दो बार कब्जा जमाया। तभी से यहां संघ की पकड़ मजबूत होनी शुरू हुई। 1980 में कल्याण सिंह सोलंकी कांग्रेस से विधायक बने। 1985, 1989 और 1991 में श्याम बिहारी सिंह ने भाजपा से हैट्रिक लगाई। उनके बाद 1993 में यह सीट सपा प्रत्याशी महिपाल सिंह के कब्जे में पहुंची। 1996 और 2002 में लगातार दो बार धर्मपाल सिंह भाजपा से विधायक बने। 2007 में  बसपा से जीते आरके शर्मा के खाते में यह सीट आई। 2012 और 2017 में लगातार दो बार भाजपा से ही धर्मपाल सिंह विधायक बने। 2017 की सरकार में धर्मपाल सिंह को सिंचाई मंत्री भी बनाया गया था, लेकिन बाद में उनसे त्यागपत्र ले लिया गया। इससे पहले भी वह प्रदेश सरकार में एक बार मंत्री रह चुके हैं।

मुद्दे तो बहुत हैं : मूलरूप से आजीविका के लिए यहां के लोग खेती पर निर्भर हैं। देहात के अन्य विधानसभा क्षेत्रों की तरह ही छुट्टा पशुओं का मुद्दा यहां भी है। इसी वजह से यहां के किसान गन्ना से मुंह मोड़कर मेंथा का बहुतायत में उत्पादन करने लगे हैं। बरेली-बदायूं मार्ग से आंवला को जोड़ने वाला मार्ग तो अच्छा है, लेकिन गांव को जोड़ने वाले तमाम मार्ग आज भी जर्जर हैं। उच्च शिक्षा के नाम पर क्षेत्र में एक डिग्री कॉलेज है। पर, यहां भी सिर्फ  बीए और बीएससी की कक्षाएं ही चलती हैं। सीएचसी और पीएचसी तो हैं, लेकिन उनमें डॉक्टरों की कमी है।
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जातीय समीकरणों में उलझी है गणित : धर्मपाल सिंह और पंडित आरके शर्मा के अलावा बसपा से लक्ष्मण प्रसाद लोधी, कांग्रेस से ओमवीर यादव, आम आदमी पार्टी से राम सिंह मौर्य, आजाद समाज पार्टी से मुईनुद्दीन, विकासशील इंसान पार्टी से शिवदास वर्मा, बहुजन मुक्ति पार्टी से मक्खन और जीराज सिंह व देवेंद्र मैथिल निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं। बसपा लोधी वोटों में सेंधमारी का जुगत लगाते हुए लक्ष्मण प्रसाद लोधी को मैदान में उतारा है। कांग्रेस के ओमवीर यादव और सपा से बगावत कर निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में उतरे जीराज सिंह यादव वोटों पर अपनी एकछत्र दावेदारी जता रहे हैं।
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वोटों का गणित
3,14,182

कुल मतदाता
मुस्लिम    80 हजार
लोधी राजपूत    40 हजार
अनुसूचित जातियां    39 हजार
यादव    38 हजार
क्षत्रिय    35 हजार
मौर्य     30 हजार
ब्राह्मण    22 हजार

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