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जानें, यूपी कैबिनेट के अहम फैसलों के बारे में

Sat, 23 Aug 2014 12:29 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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अब विभागीय मंत्री 25 करोड़ रुपये तक की योजनाओं की मंजूरी दे सकेंगे। वहीं पांच करोड़ रुपये तक की वित्तीय स्वीकृतियां अब सीधे विभागाध्यक्ष जारी कर सकेंगे।
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200 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं ही अब मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास ले जानी होंगी। प्रदेश सरकार ने सरकारी योजनाओं व परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए ये फैसले किए हैं।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में वित्तीय स्वीकृतियों के सरलीकरण से संबंधित प्रमुख सचिव वित्त की अध्यक्षता वाली कमेटी की सिफारिशों को मंजूरी दे दी गई।
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इसके तहत 25 करोड़ से अधिक एवं 100 करोड़ रुपये तक की योजनाओं को मंजूरी वित्त मंत्री, इससे ज्यादा लेकिन 200 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को  मुख्यमंत्री पास करेंगे।

200 करोड़ से ज्यादा की योजनाओं पर कैबिनेट लेगी निर्णय

200 करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं के लिए कैबिनेट से मंजूरी लेनी होगी। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने बताया कि  पहले केवल 40 लाख रुपये तक की वित्तीय स्वीकृतियां ही विभाग अपने स्तर पर जारी कर पाते थे।

इससे ज्यादा के लिए उन्हें वित्त विभाग की इजाजत लेनी होती थी। इससे काफी वक्त लगता था जिसका असर परियोजनाओं के काम पर पड़ता था।

वित्त व नियोजन विभाग की जिम्मेदारी को कम करते हुए योजना से जुड़े प्रशासकीय विभागों के अधिकार व जवाबदेही बढ़ा दी गई है। अब वे देरी से स्वीकृतियां जारी करने का बहाना नहीं बना पाएंगे। इससे परियोजनाएं समय से पूरी हो सकेंगी।

कर सकेंगे सरकारी भवनों का इस्तेमाल

उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के तहत अब निजी प्रशिक्षण संस्थान भी सरकारी व सार्वजनिक भवनों का उपयोग प्रशिक्षण देने के लिए कर सकेंगे।

अखिलेश यादव की कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। अब उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा प्रशिक्षण देने को अनुबंधित निजी संस्थाएं राजकीय व सार्वजनिक भवनों का प्रयोग कर सकेंगी। इसके लिए उन्हें लाइसेंस एग्रीमेंट करना होगा।

सिद्धार्थनगर में केंद्रीय विद्यालय के लिए पांच एकड़ भूमि
मंत्रिपरिषद ने सिद्धार्थनगर जिले में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए ग्राम थरौली, तप्पा थरौली, तहसील नौगढ़ में राजस्व विभाग की पांच एकड़ भूमि माध्यमिक शिक्षा विभाग के माध्यम से केंद्रीय विद्यालय संगठन को देने का निर्णय लिया है। यह जमीन 90 वर्ष के पट्टे पर निशुल्क दी जाएगी। इस पट्टे का प्रत्येक 30 वर्ष बाद नवीनीकरण किया जाएगा।

मृतक आश्रितों को 20 लाख रुपये

जोखिम भरी ड्यूटी के दौरान या सड़क हादसे में पुलिसकर्मियों की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को अब 20 लाख रुपये की अनुग्रह राशि मिलेगी। पहले यह रकम 10 लाख रुपये थी। शुक्रवार को प्रदेश कैबिनेट ने इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

वहीं, सेना, केंद्रीय अर्द्ध सैन्यबलों/अन्य प्रदेशों के अर्द्ध सैन्यबलों में कार्यरत उत्तर प्रदेश के मूल निवासी की प्रदेश के बाहर ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को 20 लाख रुपये अनुग्रह राशि देने का फैसला लिया गया है।

इसी प्रकार अन्य राज्यों के निवासी जो भारतीय सेना अथवा केंद्रीय अर्द्ध सैन्यबलों/अन्य प्रदेशों के अर्द्ध सैन्यबलों में कार्यरत हों, की ड्यूटी के दौरान इन्हीं परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश में मृत्यु हो जाने पर, उनके आश्रितों को भी 20 लाख रुपये दिए जाएंगे।

15 के स्‍थान पर मिलेंगे 20 लाख रुपये

इसके अलावा सीमा पर युद्ध के दौरान या आतंकवादी गतिविधियों के कारण मृत्यु होने, अति दुर्लभ पहाड़ी ऊंचाइयों/दुर्लभ सीमा/प्राकृतिक विपदाओं अथवा अति खराब मौसम में कर्तव्यपालन करते हुए मृत्यु होने पर आश्रितों को 15 लाख रुपये के स्थान पर अब 20 लाख रुपये दिए जाएंगे।

वहीं, मंत्रिपरिषद ने फीरोजाबाद में गत 15 जून की रात को बदमाशों से मुठभेड़ में शहीद हुए सिपाहियों गिरिराज किशोर और दिनेश प्रताप सिंह के आश्रितों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से स्वीकृत राशि की प्रतिपूर्ति करने का भी निर्णय किया है।

गृह विभाग की व्यवस्था के अनुसार शहीद सिपाहियों की पत्नियों को 10-10 लाख रुपये की सहायता दी गई थी। इसके अलावा मुख्यमंत्री सहायता कोष से भी 10-10 लाख रुपये की सहायता मुख्यमंत्री ने मंजूर की थी। मंत्रिपरिषद ने निर्णय किया है कि मुख्यमंत्री सहायता कोष से मंजूर 20 लाख रुपये की प्रतिपूर्ति गृह विभाग की ओर से की जाएगी।

किसानों को छह हजार करोड़ का लाभ

प्रदेश कैबिनेट ने महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर (मुआवजा) देने की अनुमति प्रदान कर दी। इससे गौतमबुद्धनगर से आगरा तक के हजारों किसानों को करीब छह हजार करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा।

यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के लिए भूमि अधिग्रहण के सैकड़ों मामलों के समाधान के लिए मंत्री राजेंद्र चौधरी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई थी।

इसमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण, अलीगढ़, मथुरा, आगरा आदि प्राधिकरणों के अधिकारी और कई डीएम शामिल थे। कमेटी ने कई बार सुनवाई करके भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों का अदालत के बाहर समाधान करने के लिए 64.7 प्रतिशत मुआवजा बढ़ाने की सिफारिश की थी। उच्च न्यायालय ने नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में भी इसी तरह 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे के निर्देश दिए थे।

किस्तों के आधार पर भी होगा भुगतान

कैबिनेट ने तय किया है कि किसानों को दी जाने वाली अतिरिक्त मुआवजे की रकम संबंधित आवंटियों से आनुपातिक रूप से ली जाएगी। प्राधिकरण के पास उपलब्ध आवंटन योग्य भूमि के आवंटन दर निर्धारण में भी इसे आनुपातिक रूप में लागू किया जाएगा।

प्राधिकरण ने आपसी सहमति के आधार पर जिन किसानों से बैनामों से सीधे जमीन खरीदी है, उन्हें भी यह लाभ दिया जाएगा। प्राधिकरण की वित्तीय स्थिति को देखते हुए यदि अतिरिक्त राशि का एकमुश्त भुगतान संभव न हो सके तो किस्तों में अथवा विकसित भूमि के रूप में भुगतान किए जाने पर भी विचार किया जा सकेगा।
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कानूनी अड़ंगा न लगाने का करना होगा वादा

किसानों द्वारा प्राधिकरण को जमीन का भौतिक कब्जा सौंपने तथा किसी भी न्यायालय में विचाराधीन रिट याचिका/वाद को वापस लेने, प्राधिकरण के तथा आवंटियों के विकास कार्यों में भविष्य में भी कोई बाधा उत्पन्न न करने तथा भविष्य में भी भूमि अर्जन के विरुद्ध कोई भी वाद किसी न्यायालय में योजित न किए जाने का अनुबंध पत्र प्रस्तुत करने पर ही अतिरिक्त मुआवजा दिया जाएगा। अतिरिक्त मुआवजे पर आने वाला खर्च प्राधिकरण अपने स्रोतों से खुद वहन करेंगे।

स्टांप शुल्क से छूट
मंत्रिपरिषद ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा एकीकृत टाउनशिप विकसित करने के लिए इक्विटी के रूप में कंपनी (एसपीवी) को हस्तांतरित की जा रही भूमि को स्टांप शुल्क से छूट देने का निर्णय लिया है। पहले एसपीवी से स्टांप शुल्क वसूलने की व्यवस्था थी।
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