डॉ. कटार सिंह
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वाकया सन 1991 के यूपी विधानसभा चुनाव का है। जनता दल से चौधरी अजित सिंह अपने हिस्से में आई सीटों पर टिकटों का वितरण कर रहे थे। बागपत के गांव रंछाड़ के रहने वाले डॉ. कटार सिंह पार्टी के पुराने कार्यकर्ता थे। वह लंबे समय से बरनावा विधानसभा क्षेत्र से टिकट मांग रहे थे।
टिकट मांगने के लिए ही दिल्ली के 12 तुगलक रोड स्थित चौधरी अजित सिंह के आवास पर पहुंच गए। टिकट का जिक्र चलते ही अजित सिंह ने मुस्कुराकर कहा, अब टिकट का क्या करोगे। अब तो आपके चुनाव लड़ने की उम्र नहीं रही।
बस यह सुनते ही कटार सिंह भड़क गए और बोल पड़े-1955 से बड़े चौधरी (स्व. चौधरी चरण सिंह) के साथ हूं। वह तो हमेशा यह कहते रहे कि अभी चुनाव लड़ने की उम्र नहीं हुई है। अभी तो पूरी उम्र पड़ी है। चिंता मत करो, चुनाव लड़ा देंगे। अब आप कह रहे हो कि मेरी उम्र निकल गई।
आखिर मेरी उम्र गई तो गई कहां? मुझे इसका हिसाब चाहिए। इस पर चौधरी अजित सिंह पहले तो हतप्रभ रह गए और फिर मुस्कुरा कर बोले- अच्छा नाराज मत हो। लड़ लो...। कटार सिंह को टिकट दिया गया और वह चुनाव जीत गए।