रेलमंत्री सुरेश प्रभु के हाईटेक रेलवे का सपना आरडीएसओ पूरा करेगा। इसके लिए आरडीएसओ को एक दर्जन से ज्यादा महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट संस्था को सौंपे गए हैं। इसमें कोच के अलावा लोको इंजन, प्लेटफॉर्म, स्टेशन, ओवरब्रिज समेत अन्य कई कार्यों को पूरा किया जाएगा।
आरडीएसओ अधिकारियों के मुताबिक, विभिन्न शोध व विकास के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 में करीब 265 करोड़ रुपये मिलेंगे। जो भी प्रोजेक्ट बजट में दिए गए हैं, उनके लिए पूर्व में रेल मंत्रालय ने फिजिबिलिटी टेस्ट करवाए थे।
सकारात्मक रिपोर्ट देखने के बाद ही बजट में इनकी घोषणा की गई है। बजट में अनुमति मिलने के बाद सभी कार्य आरंभ करने के निर्देश संबंधित विभागों को दे दिए गए हैं। इस वर्ष के मध्य से लेकर अगले तीन वर्षों में ज्यादातर प्रोजेक्ट पूर्ण हो जाएंगे। इसके बाद तकनीकी के मामले में भारतीय रेल वैश्विक स्तर की होगी।
ये हैं प्रमुख प्रोजेक्ट
रेलगाड़ियों को आपसी टक्कर बचाने के लिए र्कई वर्षों से एंटी कोलिजन डिवाइस लगाने की बात चल रही है। मगर कुछ माह पूर्व आरडीएसओ ने यह डिवाइस विकसित करके इसका ट्रायल साउथ सेंट्रल रेलवे में आरंभ कर चुका है।
इसके तहत रेलगाड़ियों के अलावा रेलवे ट्रैक पर विशेष डिवाइस लगाए जाते हैं, जो गाड़ियों के आमने-सामने आने की स्थिति में इमरजेंसी ब्रेक लगा देता है।
बजट में जीरो एक्सीडेंट की बात कही गई है। वहीं आरडीएसओ को निर्देश दिए गए हैं कि देश की लगभग सात हजार गाड़ियों और 12 हजार किलोमीटर लंबे ट्रैक पर यह डिवाइस लगाई जाएगी। इस काम के लिए उन्हें तीन वर्षों का वक्त दिया गया है।
पिछले दिनों डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन में आरडीएसओ द्वारा विकसित वैक्यूम सुविधा वाले बायो टॉयलेट लगाया गया था, जिसका ट्रायल सफल रहा है। बजट में इसकी चर्चा करते हुए रेलमंत्री ने ऐसे 70 हजार बायो टॉयलेट विभिन्न गाड़ियों में लगाने की घोषणा की है।
इन टॉयलेट को तैयार करने का जिम्मा भी आरडीएसओ को ही सौंपा गया है। प्रथम चरण में राजधानी गाड़ियों में, उसके बाद शताब्दी फिर अन्य एक्सप्रेस और मेल गाड़ियों में बायो टॉयलेट लगाया जाएगा। वित्तीय वर्ष2016-17 के अंत से ऐसे टॉयलेट लगने शुरू हो जाएंगे।
दिल्ली में लाइव दिखेगा चारबाग स्टेशन
बजट में जिन सेमी हाईस्पीड तेजस गाड़ियों को चलाने की बात कही गई है, वे सबसे पहले नौ रूट पर चलेंगी। इनमें दिल्ली से लखनऊ के अलावा आगरा, मुगलसराय, लुधियाना रूट सहित सिकंदराबाद-बंगलौर,मैसूर-बंगलौर-चेन्नई, नागपुर-विलासपुर, नागपुर-मुंबई आदि को शामिल किया गया है।
आरडीएसओ अफसरों के मुताबिक 130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली इन गाड़ियों को ऐसे रूट पर चलाना बेहतर है, जहां मानवरहित क्रॉसिंग न हों। इसके अलावा हाईस्पीड गाड़ियों के ट्रायल के लिए एक टेस्ट ट्रैक भी तैयार किया जाएगा।
वहीं अब तैयार होने वाली डबल डेकर गाड़ियां पूरी तरह चेयर कार वाली होंगी। इसकी डिजाइनिंग आरडीएसओ करेगा।
चारबाग समेत देश के सौ प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर खास तरह के सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। आरडीएसओ और इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के संयुक्त प्रयासों से तैयार किए जाने वाले ये कैमरे सेटेलाइट ऑपरेटेड होंगे।
इनमें जूम करने की खासियत होगी, जिससे ये छोटी से छोटी चीज को बड़ा करके दिखाने में सक्षम होंगे। न केवल स्टेशन बल्कि डिवीजनल, जोनल ऑफिस के साथ ही रेलवे बोर्ड मुख्यालय इन कैमरों से देश के सभी सौ स्टेशनों पर होने वाली गतिविधि को लाइव देख सकेगा।
शुरुआत में इनसे ब्लैक एंड व्हाइट विजुअल मिलेगा। बाद में बैंड विथ बढ़ाकर इसे कलर किया जाएगा। यात्री सुरक्षा के लिहाज से स्टेशन के एक-एक कोने की निगरानी इन कैमरों के जरिये बहुत बेहतर तरीके से संभव है।
ये भी हैं कुछ खास प्रोजेक्ट
•गैंगमैनों की सुरक्षा के लिए एडवांस वॉर्निंग देने वाली खास डिवाइस विकसित की जाएगी। रेडियो तकनीक पर काम करने वाली इस डिवाइस को पोर्टेबल ट्रांसमीटर से संचालित किया जाएगा। यह गैंगमैन व रेलवे के अन्य मेंटेनेंस स्टाफ को ट्रैक पर आने वाली ट्रेनों के लिए आगाह करेगा।
•मोबाइल पर गाड़ियों की लाइव स्थिति दिखाने की जिम्मेदारी भी आरडीएसओ को दी गई है। रेल मंत्री की मंशा है कि जीपीएस आधारित रिटल टाइम ट्रेन इंफॉर्मेशन तकनीक को रेलगाड़ियों में इंस्टॉल किया जाए। इससे मोबाइल कनेक्ट करने की दशा में उन्हें ट्रेन की मौजूदा लोकेशन लगातार मिलती रहेगी।
•25 टन से अधिक भार उठाने की क्षमता वाले विशेष कोच भी बनाए जाएंगे। इसके अलावा सड़क और रेल ट्रैक दोनों पर चलने वाले विशेष वाहन बनाए जाएंगे। जिससे लॉजिस्टिक सर्विस को और बेहतर बनाया जा सकेगा। तेजी से बन रहे फ्रेट कॉरिडोर में इनका इस्तेमाल किया जाएगा।
•मुंबई में चर्च गेट से विरार और वीटी थाने के बीच तैयार किए जाने वाले एलिवेटेड ट्रैक की डिजाइनिंग का काम भी आरडीएसओ के जिम्मे है। बजट में इसे तैयार किए जाने की घोषणा की गई है। मुंबई के बाद देश के अन्य बड़े शहरों में इस प्रकार के एलिवेटेड ट्रैक को बनाने का काम होगा।
•एलईडी लाइटों का इस्तेमाल करने के लिए रेल बजट में जोर दिया गया है। आरडीएसओ रेलगाड़ियों के इंजन में रोशनी के लिए लगने वाले हैलोजन बल्ब को हटाकर 60 वाट के एलईडी बल्ब और सिग्नल पर लगने वाले 12 वोल्ट के मौजूदा बल्ब के बजाय 4 वाट का एलईडी बल्ब विकसित करेगा।