एक अक्तूबर 2020 से देश में सरसों के तेल में कोई और तेल मिलाने पर पाबंदी लगा दी गई। पहले ब्लेंडेड (मिश्रित) सरसों के तेल में सोयाबीन, पामोलिन और राइस ब्रान तेल भी मिला देते थे। नियम था कि ब्लेंडेड सरसों के तेल में न्यूनतम 20% तेल सरसों का ही होना चाहिए। इससे कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ।
दामों में अभी और इजाफा
अभी खुले बाजार में सरसों न्यूनतम समर्थन मूल्य (4650 रुपये प्रति क्विंटल) से 850 रुपये तक ज्यादा रेट पर बिक रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बोआई और त्योहारी सीजन में सरसों की मांग बढ़ेगी जिससे कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।
प्रदेश में खाद्य तेल के दाम बढ़ने के पीछे मांग के अनुरूप बेहद कम उत्पादन होना भी है। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में एक वित्त वर्ष में खाद्य तेल की कुल खपत 8 लाख मीट्रिक टन तक होती है, जबकि खाद्य तेलों का उत्पादन 3 लाख मीट्रिक टन ही होता है। इसलिए जरूरत की अधिकांश मात्रा प्रदेश के बाहर से ही मंगानी पड़ती है।
वहीं तेल के आयात पर अधिकतम आयात कर लगा देने से कुल आयात में भी भारी कमी आई है। 2018-19 के मुकाबले पिछले साल प्रदेश में सरसों की बोआई के रकबे में 53 हजार हेक्टेयर की कमी हुई। मौसम की मार भी फसल पर पड़ी। नतीजतन, सरसों के उत्पादन में 2.31 लाख मीट्रिक टन की गिरावट आई।
यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में नेशनल एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नैफेड) के गोदाम में बमुश्किल 350 मीट्रिक टन सरसों बीज ही उपलब्ध है। अधिकारियों का कहना है कि बोआई और त्योहारों का सीजन एक साथ आ जाता है। इसलिए अक्तूबर-नवंबर में मांग ज्यादा होने से सरसों के तेल के भाव बढ़ जाते हैं। मौजूदा समय में सरसों के तेल का थोक मूल्य 122 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। वहीं, खुदरा में उपभोक्ताओं को 140 रुपये प्रति किलोग्राम तक खरीदना पड़ रहा है।
सरकार ने विदेशों से आने वाले खाद्य तेल पर अधिकतम आयात कर लगा दिया है। रेट बढ़ने की एक वजह यह भी है। खाद्य तेल उत्पादन से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि देश में चालू तिलहन वर्ष (1 नवंबर-31 अक्तूबर) में अभी तक पाम ऑयल का आयात 20 लाख मीट्रिक टन घटा है, जबकि अन्य तेलों का आयात 10 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है। इस तरह खाद्य तेल के कुल आयात में 10 लाख मीट्रिक टन की कमी आई है।
उत्तर प्रदेश में सरसों का उत्पादन
वर्ष क्षेत्रफल उत्पादन
(लाख हेक्टेयर) (लाख मीट्रिक टन)
2018-19 7.56 12.95
2019-20 7.03 10.64
अलग-अलग किस्म के खाद्य तेलों के थोक भाव (प्रति किलोग्राम)
सोयाबीन 94 रुपये+टैक्स 100 रुपये
पाम ऑयल 87 रुपये+टैक्स 92 रुपये
कच्ची घानी (शुद्ध सरसों) 115 रुपये+टैक्स 122 रुपये
सरकार की नीतियां दलहन-तिलहन के उत्पादन को प्रोत्साहन देने की है ताकि किसान गेहूं व धान की जगह इन फसलों की अधिकाधिक खेती करें और उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिले। सरसों के तेल की शुद्धता संबंधी नियम इसी वजह से लागू किया गया है। इससे स्वदेशी तेल को बढ़ावा के साथ ही किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे। अभी हम देश और प्रदेश में खाद्य तेल का जितना उत्पादन करते हैं, उससे दोगुनी खपत है। सरकार की प्रोत्साहन नीति का ही परिणाम है कि सरसों का दाम सरकार की ओर से निर्धारित एमएसपी से लगातार ज्यादा चल रहा है। सरसों के शुद्ध तेल के थोक मूल्य में भी पिछले दो-तीन महीने में 20 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई है। सरसों के तेल में मिलावट की अनुमति न दिए जाने का सीधा फायदा सरसों उत्पादक किसानों को मिलेगा।
- घनश्याम खंडेलवाल, एमडी, बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड
बोआई के वक्त हर साल सरसों के भाव चढ़े रहते हैं। त्योहारों के सीजन के कारण भी नवरात्र से दिवाली तक खाद्य तेल की मांग ज्यादा रहती है। इन वजहों से सरसों के तेल के रेट में वृद्धि हुई है। - विजय शर्मा, ब्रांच मैनेजर, नैफेड
सरसों तेल के दाम में वृद्धि की जानकारी मिली है। इस बारे में प्रमुख सचिव, खाद्य से भी बात की है। शीघ्र ही उचित निर्देश जारी किए जाएंगे। - आलोक सिन्हा कृषि उत्पादन आयुक्त