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पर्दे के पीछे से बीजेपी के लिए इस तरह लड़ रहा है संघ

Mon, 13 Feb 2017 01:33 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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डेमो - फोटो : demo pic
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भगवा टोली की तरफ से एक चुनावी लड़ाई परदे के बाहर लड़ी जा रही है तो दूसरी परदे के पीछे से। परदे के बाहर की लड़ाई की कमान सीधे तौर पर भाजपाइयों के हाथ में हैं तो परदे के पीछे वाली लड़ाई की कमान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संभाल रखी है।
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इस लड़ाई के लिए हर जिले में समन्वयक बनाने के साथ संघ के वरिष्ठ लोगों की टोलियां गठित की गई हैं। ये टोलियां ड्राइंग रूम बैठकों के जरिये भाजपा की जीत के समीकरण दुरुस्त करने में जुटी हैं।

साथ ही स्थानीय स्तर पर लोगों से बातचीत करके उन रास्तों को भी तलाश रही हैं, जिनसे स्थानीय स्तर पर भाजपा उम्मीदवार की जीत वाले समीकरण फिट किए जा सकें। 
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पूरे प्रदेश में जिला और क्षेत्र स्तर पर संघ से जुड़े लोगों की टोलियों का गठन किया गया है। टोलियों का प्रमुख संबंधित स्थान पर संघ परिवार के किसी वरिष्ठ व्यक्ति या कार्यवाह या फिर संघचालक को बनाया गया है।

नगर और ब्लॉक स्तर पर भी टोलियां बनाई गई हैं। इसी के साथ अलग-अलग वर्ग वार जैसे व्यवसाय, शिक्षा, चिकित्सा व वकालत जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों और कर्मचारी संगठनों के नेताओं से जुड़े लोगों के समूह बनाकर उन्हें संबंधित वर्ग के बीच भाजपा की पैरोकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।  प्रत्याशियों को लेकर अगर कहीं कोई झिझक या नाराजगी है तो उसे भी दूर करने की जिम्मेदारी इन टोलियों पर डाली गई है।
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कर रहे हैं तर्कों से समझाने की को‌श‌िश

डेमो - फोटो : demo pic
इन टोलियों के लोग तर्कों और प्रत्याशी चयन के पीछे मौजूद कारणों का हवाला देकर लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही संबंधित स्थान के किसी पुराने कार्यकर्ता को टिकट न मिल पाने की वजह बताकर भी मान-मनौव्वल कर रहे हैं।

आवश्यक होने पर संबंधित व्यक्ति की भाजपा के किसी बड़े नेता या संघ के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी से बातचीत कराकर भी नाराजगी को दूर करने की कोशिश हो रही है। चुनाव प्रबंधन से जुड़ी समितियों के लोगों को भी इस टोली से लगातार संवाद व संपर्क रखने की हिदायत दी गई है।

जिससे इन्हें मिलने वाले फीडबैक के आधार पर संबंधित स्थान के चुनाव प्रबंधन से जुड़े कामकाज को और दुरुस्त किया जा सके।टिकट वितरण के बाद जगह-जगह जिस तरह से विरोध व विद्रोह के स्वर गूंजे, उससे कई कार्यकर्ता व नेता घर बैठ गए तो कुछ ने भाजपा के खिलाफ झंडा उठा लिया। 

कई जगह से इस तरह की शिकायतें आईं कि पार्टी उम्मीदवार भी स्थानीय कार्यकर्ताओं से तालमेल बनाकर नहीं चल रहे हैं। पार्टी के निष्ठावान पुराने अनुभवी लोगों को दरकिनार करके काम कर रहे हैं।

इस सबके बाद संघ के कान खड़े हो गए। उसे लगा है कि पुराने और विश्वसनीय लोगों को न जुटाया गया तो माहौल बिगड़ सकता है। साथ ही ‘मिशन 2017’ की सफलता की राह में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

अभियान से जुड़े एक वरिष्ठ प्रचारक ने बताया कि पांच-छह मतदान केंद्रों को फोकस करते हुए लगाए गए विभिन्न संगठनों के लोगों को न सिर्फ चुनावी अभियान बल्कि मतदान के लिए चल रहे प्रबंधों पर भी नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है।

जिससे अगर कहीं बूथ कमेटियां निष्क्रिय या सिर्फ कागजों तक ही सीमित हों तो वहां वैकल्पिक प्रबंध किए जा सकें। इसी के साथ कहां पर किन-किन लोगों से मिलकर या उन्हें मिलाकर वोट बढ़ाने का प्रबंध किया जा सकता है, इस काम में कौन व्यक्ति उपयोगी हो सकता है, इस बारे में भी रोजाना समीक्षा हो रही है। 
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