भगवा टोली की तरफ से एक चुनावी लड़ाई परदे के बाहर लड़ी जा रही है तो दूसरी परदे के पीछे से। परदे के बाहर की लड़ाई की कमान सीधे तौर पर भाजपाइयों के हाथ में हैं तो परदे के पीछे वाली लड़ाई की कमान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संभाल रखी है।
इस लड़ाई के लिए हर जिले में समन्वयक बनाने के साथ संघ के वरिष्ठ लोगों की टोलियां गठित की गई हैं। ये टोलियां ड्राइंग रूम बैठकों के जरिये भाजपा की जीत के समीकरण दुरुस्त करने में जुटी हैं।
साथ ही स्थानीय स्तर पर लोगों से बातचीत करके उन रास्तों को भी तलाश रही हैं, जिनसे स्थानीय स्तर पर भाजपा उम्मीदवार की जीत वाले समीकरण फिट किए जा सकें।
पूरे प्रदेश में जिला और क्षेत्र स्तर पर संघ से जुड़े लोगों की टोलियों का गठन किया गया है। टोलियों का प्रमुख संबंधित स्थान पर संघ परिवार के किसी वरिष्ठ व्यक्ति या कार्यवाह या फिर संघचालक को बनाया गया है।
नगर और ब्लॉक स्तर पर भी टोलियां बनाई गई हैं। इसी के साथ अलग-अलग वर्ग वार जैसे व्यवसाय, शिक्षा, चिकित्सा व वकालत जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों और कर्मचारी संगठनों के नेताओं से जुड़े लोगों के समूह बनाकर उन्हें संबंधित वर्ग के बीच भाजपा की पैरोकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रत्याशियों को लेकर अगर कहीं कोई झिझक या नाराजगी है तो उसे भी दूर करने की जिम्मेदारी इन टोलियों पर डाली गई है।