सपा में शीर्ष स्तर पर चल रहे घमासान में मुलायम सिंह यादव को लिखी गई रामगोपाल यादव की तल्ख चिट्ठी के बाद सपा में अंदरूनी हलचल तेज हो गई है। रामगोपाल ने सपा मुखिया से कहा है कि पार्टी की स्थापना के लिए जो जनता आपकी पूजा करती है, इसके पतन के लिए आपको और सिर्फ आपको दोषी ठहराएगी। इतिहास बहुत निष्ठुर होता है, वह किसी को बख्शता नहीं है।
मुलायम सिंह ने जब से अखिलेश यादव को 2017 के चुनाव के लिए चेहरा बनाने से इन्कार किया है, तब से पार्टी में इस मुद्दे पर हर जगह चर्चा है। यह अलग बात है कि परिवार के विवाद में कोई बोलने को तैयार नहीं है। शनिवार को रामगोपाल यादव ने मुलायम के बयान पर उन्हें पत्र लिखकर न केवल तीखी प्रतिक्रिया जताई, उनके फैसले पर सवाल पर भी उठा दिए। उन्होंने अखिलेश की पुरजोर वकालत की है।
पहला मौका है, जब रामगोपाल ने मुलायम सिंह को इस तरह की भाषा में पत्र लिखा है। उन्होंने पूरे विवाद में मुलायम सिंह और उनके सलाहकारों को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा है, प्रदेश की वर्तमान सपा सरकार ने जो काम किए हैं, वे पूरे देश के लिए पथ प्रदर्शन का कार्य कर रहे हैं।
पार्टी तभी जीतेगी जब अखिलेश चेहरा होंगे
रामगोपाल यादव
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पत्र में रामगोपाल ने कहा है कि सीएम अखिलेश निर्विवाद रूप से प्रदेश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। पिछले दिनों जो कुछ हुआ है, उससे पार्टी का मतदाता निराश और हताश है। अब तो उसमें नेतृत्व के प्रति आक्रोश पैदा हो रहा है। स्थिति यह बन गई है कि यदि मतदाता को अहसास हो जाएगा कि कोई प्रत्याशी मुख्यमंत्री विरोधी है तो वह विधानसभा का मुंह नहीं देख पाएगा।
रामगोपाल ने नेताजी (मुलायम सिंह) के सलाहकारों पर निशाना साधा है। पत्र में उन्होंने कहा, लोगों को कष्ट यह है कि पहले नंबर पर चल रही पार्टी कुछ इने-गिने लोगों की गलत सलाह के कारण के चलते काफी पीछे छूट गई है। ये जो आजकल आपको सलाह दे रहे हैं, जनता की निगाह में उनकी हैसियत शून्य हो गई है।
पारिवारिक विवाद में रामगोपाल शुरू से अखिलेश के साथ हैं। मुलायम के बयान के बाद वह पहले नेता हैं जिन्होंने अखिलेश के पक्ष में इतनी खुलकर वकालत की है। उन्होंने कहा है, पार्टी चाहे जिसे टिकट दे लेकिन जीतेगा तो वही जिसकी हैसियत होगी। सपा तभी चुनाव जीतेगी जब पार्टी का चेहरा अखिलेश होंगे।
रामगोपाल ने एक तरह से यह संदेश दे दिया है कि नेताजी के फैसलों से पार्टी डूबने की तरफ है। उन्होंने कहा, अगर आप चाहते हैं कि पार्टी फिर 100 से नीचे चली जाए तो आप चाहे जो फैसला लें। लेकिन एक बात याद रखें कि जो जनता समाजवादी पार्टी बनाने के लिए आपकी पूजा करती है, वही जनता सपा के पतन के लिए आपको और सिर्फ आपको दोषी ठहराएगी।