केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के अध्यक्ष रामदास अठावले यूपी में अपनी पार्टी के पुराने दिनों की वापसी चाहते हैं। वे कहते हैं, आरपीआई के हाथी पर बसपा ने कब्जा कर लिया है, उससे हाथी को छीना जाएगा।
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अठावले का मानना है कि यदि भाजपा यूपी में आरपीआई से चुनावी गठबंधन कर ले तो सौ फीसदी उसकी सरकार बनेगी। वह मायावती के इन आरोपों से इत्तफाक नहीं रखते कि भाजपा सरकार बनने के बाद दलितों पर उत्पीड़न के मामले बढ़े हैं।
वे सवाल करते हैं- किस सरकार में दलितों का उत्पीड़न नहीं हुआ ? जातिवाद का खात्मा करके ही दलित उत्पीड़न को रोका जा सकता है। ‘अमर उजाला’ ने आरपीआई की चुनावी रणनीति व अन्य मुद्दों पर अठावले से विस्तार से बातचीत की, पेश हैं प्रमुख अंश-
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सवाल- यूपी में आपकी सक्रियता बढ़ी है, भविष्य की क्या योजना है?
जवाब- यूपी में आरपीआई का पुराना आधार रहा है। चौधरी चरण सिंह की सरकार में आरपीआई के 4 मंत्री और 16 विधायक थे। सभी हाथी के निशान पर चुनाव जीतकर आए थे। हमारे हाथी को मायावती ने छीन लिया। हम उसे वापस लेना चाहते हैं। इसी योजना पर काम कर रहे हैं।
'25-30 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव'
सवाल- 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से गठबंधन होगा या अकेले लड़ेंगे ?
जवाब- हम भाजपा से गठबंधन चाहते हैं, राजनाथ सिंह समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं से इस बारे में बात हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भी बात करेंगे। भाजपा हमसे गठबंधन करेगी तो यूपी में 100 फीसदी उसकी सरकार बनेगी। हमने यूपी में 25-30 सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा है। गठबंधन नहीं हुआ तो आरपीआई अकेले दो-ढाई सौ सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
सवाल- यूपी के दलितों को कैसे मायावती से अलग करेंगे ?
जवाब- सवाल मायावती से दलितों को अलग करने का नहीं, बल्कि अपनी पुरानी जमीन को वापस लेने का है। मायावती यहां केवल चुनावी राजनीति करती हैं। हम दलितों के मुद्दों को लेकर उनके बीच जाएंगे। पहले हमारी ताकत नहीं थी, अब वे हमारी बात सुनेंगे। दलितों में मायावती से नाराजगी है, हमें इसका लाभ मिलेगा। इस चुनाव में हम यूपी में खड़ा होने की कोशिश करेंगे।
'जातिवादी मानसिकता के कारण हो रहे हैं दलितों पर हमले'
- फोटो : amar ujala
सवाल- दलित उत्पीड़न के मुद्दे पर मायावती केंद्र सरकार की घेराबंदी कर रही हैं, आप कैसे जवाब देंगे ?
जवाब- दलित अत्याचार भाजपा सरकार में तो बढ़ा नहीं है। केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब भी दलित उत्पीड़न की घटनाएं होती थीं। यूपी में बसपा के राज में भी दलितों का उत्पीड़न हुआ है और सपा के राज में भी हो रहा है। इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। केवल कानून से दलितों पर अत्याचार नहीं रोके जा सकते हैं। जब तक समाज में बदलाव नहीं आएगा ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।
दलितों के खिलाफ आपराधिक मामलों की असली वजह जातिवादी मानसिकता है। सभी दलों को मिलकर जातिवाद के खात्मे के लिए काम करना चाहिए। इंटरकास्ट मैरिज को बढ़ावा देने से जातिवाद कम होगा। हम इस दिशा में काम करेंगे। अंतरजातीय विवाहों पर प्रोत्साहन राशि को बढ़ाएंगे।
सवाल- गौरक्षा के नाम पर दलित उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं, गुजरात के ऊना में तो मायावती भी गईं?
जवाब- इस तरह की घटनाएं नहीं होनी चाहिए। दलित भी इस देश के नागरिक हैं, उनका भी सम्मान होना चाहिए। गौरक्षा जरूरी है लेकिन लोगों को कौन बचाएगा? मेरा कहना है कि ऐसी घटनाओं पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। हमें दलित विरोधी मानसिकता के खिलाफ लड़ना होगा।
सवाल- आरक्षण की समीक्षा और कुछ जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग पर आपका क्या रुख है?
जवाब- एकदम साफ है, हम आरक्षण से कोई छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम तो आरक्षण की सीमा को 50 फीसदी से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने के पक्षधर हैं। जहां तक कुछ जातियों की एससी, एसटी में शामिल होने की मांग है, इस पर विचार होना चाहिए। हम इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से बात करेंगे।
सवाल- मायावती आप पर भाजपा की गोद में बैठने का आरोप लगाती हैं?
जवाब- मुझ पर आरोप लगाने से पहले मायावती को अपने बारे में सोचना चाहिए। वह भाजपा के सहयोग से तीन बार मुख्यमंत्री बनी हैं। हम अंबेडकरवादी हैं, हमने बौद्ध धर्म अपनाया।
मायावती खुद को अंबेडकरवादी कहती हैं लेकिन वह बौद्ध नहीं हैं। हमारा भाजपा से गठबंधन है, लेकिन हमारी अपनी विचारधारा है। जरूरी नहीं है कि हम भाजपा के हर विचार से सहमत हों।