कारसेवकपुरम में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, एलएंडटी व पत्थरों की सफाई करने वाली केएलए कंपनी के इंजीनियरों से विचार विमर्श के बाद करीब डेढ़ बजे श्रीरामजन्मभूमि परिसर पहुंचे। यहां अलग-अलग स्थानों के करीब 80 फीट तक गहरे मिट्टी के नमूने की जांच की गई। देखा गया कि भूमि की उपयोगिता क्या है। किस प्रकार से भूमि सुरक्षित है। कितने वर्ष तक मंदिर यहां विराजमान रह सकता है।
गुजरात से आए शिल्पी आशीष सोमपुरा की टीम ने तमाम प्राचीन मंदिरों की रिपोर्ट साझा की। एलएंडटी के इंजीनियरों ने सरयू नदी के कछार से लेकर उसकी धाराएं बार-बार बदलने पर भी राय रखी। इंजीनियरों ने सदियों तक अक्षुण्ण रहने वाले राममंदिर के निर्माण को लेकर डेढ़ एकड़ के प्रस्तावित परिसर के करीब दोगुने आकार में आरसीसी की गहरी नींव बनाने की रणनीति बनाई। इसे पांच से छह लेयर में पांच से आठ फिट मोटा बनाने की बात हुई। इसी नींव पर प्रस्तावित मंदिर मॉडल में तय पत्थर की नींव बनाई जाएगी।
इसके बाद भूतल, प्रथम तल व शिखर का निर्माण होगा। भूकंप रोधी सभी तकनीकी उपाय अपनाए जाएंगे। सरयू की ओर से आने वाली हवाओं का असर मंदिर पर न पड़े, इसके लिए 70 एकड़ भूभाग के चहारदीवारी के पहले तीन लेयर में वृक्षारोपण की भी रणनीति बनाई गई। इंजीनियरों का कहना था कि नींव की खुदाई और तैयार होने में रात दिन चार शिफ्ट में काम होने पर भी छह से सात महीने लगेंगे।