मॉडल का विरोध करने वालों पर कहा कि लोगों को अपनी महत्वाकांक्षा पर अंकुश रखना चाहिए और ट्रस्ट पर कोई दवाब नहीं बनाना चाहिए। कहा कि आम जनमानस ने इस नक्शे पर विश्वास किया है, इसका विरोध करना मंदिर निर्माण की प्रतीक्षा को और लंबा करने का प्रयास है।
कहा कि राममंदिर व काशी विश्वनाथ की अपनी स्वंय की महिमा है, यह किसी स्थापत्य कला का मोहताज नहीं है। मंदिर लाखों रामभक्तों की भावना के आधार पर ही बन रहा है। मंदिर खड़ा होने दीजिए, रामनगरी की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा शिखर पर होगी। इस दौरान महंत कमलनयन दास व अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जीतेंद्रानंद सरस्वती भी मौजूद रहे।