एसआईटी मंदिर निर्माण के बाद शुरू हुई दान प्रक्रिया की पूरी जानकारी जुटा रही है। दान किस प्रकार लिया जाता था, उसकी गिनती कैसे होती थी और उस समय वहां कौन-कौन लोग मौजूद रहते थे, इसकी पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के अनुसार 40 से 50 लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। एसआईटी यह भी देख रही है कि सुरक्षा व्यवस्था में कौन-कौन लोग तैनात थे और उनकी मौजूदगी में कथित रूप से रकम कैसे गायब हुई। इन सभी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। टीम ने पूरा लेखा-जोखा जुटा लिया है और सीसीटीवी फुटेज को अहम साक्ष्य माना जा रहा है।
मामले में ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी महिपाल सिंह ने आरोप लगाया था कि आठ महीने के सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिए गए थे। एसआईटी इस बिंदु पर गहन जांच कर रही है। मामले में सबसे अहम साक्ष्य सीसीटीवी फुटेज ही माने जा रहे हैं, जिनसे यह पता चल सकेगा कि कब, किसने और किस प्रकार कथित तौर पर रकम गायब की और मामला कैसे उजागर हुआ।
धर्मसेना भारत के प्रमुख संतोष दुबे ने श्रीराम जन्मभूमि परिसर के दानपात्रों से करोड़ों रुपये, सोने-चांदी के आभूषण और सिक्कों के कथित गबन का आरोप लगाते हुए कोतवाली नगर में तहरीर दी है। तहरीर में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय बंसल, अनिल मिश्रा, गोपाल राव और राममंदिर कार्यालय के कर्मचारी टिन्नू दुबे समेत अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। संतोष दुबे का आरोप है कि श्रद्धालुओं द्वारा दानपात्रों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और सिक्के चढ़ाए जाते रहे हैं। तहरीर के अनुसार दानपात्रों से निकाली गई धनराशि और आभूषणों का सही लेखा-जोखा नहीं रखा गया तथा 200 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि और कीमती सामान का गबन किया गया। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की है। वहीं ट्रस्ट की ओर से भी आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके अलावा यूपी युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला व करणी सेना भी शिकायत की है लेकिन अब तक केस दर्ज नहीं किया गया है।