चंपत राय और अनिल मिश्रा
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एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में स्पष्ट था कि अनिल मिश्रा ही गणना प्रक्रिया के सबसे अहम जिम्मेदार पदाधिकारी थी। एमओयू से लेकर अन्य जो भी कागजी करार बैंक के साथ हुआ था उसमें अनिल मिश्रा ने ही हस्ताक्षर किए थे। एक तरह से उन्हें ही ट्रस्ट की तरफ से ये अधिकार दिए गए थे। लेकिन उन्होंने नियमों में बदलाव कर दिए। जो शर्तें तय थीं उनको दरकिनार किए। इसलिए अनिल मिश्रा दोषी पाए गए हैं। इस्तीफा स्वीकार होने से उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तो हो गई है लेकिन कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। हालांकि अनिल पर कार्रवाई होगी या नहीं, इसके निर्देश ऊपर से ही आएंगे। तभी इस पर निर्णय पुलिस अधिकारी लेंगे।
बैंक की लापरवाही का फिर जिक्र, व्यवस्था बदलने की सिफारिश
गणना प्रक्रिया में सबसे बड़ी खामियां मिली थीं। फाइनल रिपोर्ट में भी उनका जिक्र है। खासकर गिनती प्रक्रिया में आउटसोर्सिंग कर्मियों को लगाना व भी हाउसकीपिंग कंपनी के जरिए। इसे एसआईटी ने बेहद गंभीरता से लिया है। बैंक अधिकारियों पर भी कार्रवाई को लेकर लिखा गया है। एसआईटी ने इस व्यवस्था को बदलने की सिफारिश करते हुए गणना में बैंक के नियमित कर्मियों को लगाने को कहा है।
एसआईटी जांच में खुलासा हुआ था कि मंदिर प्रबंधन ने अधिकतर सिफारिशी भर्ती किए थे। इसलिए अब एसआईटी ने सुझाव दिया है कि प्रक्रिया के तहत योग्य लोगों को पदों पर भर्ती किया जाए। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। वहीं सुरक्षा व्यवस्था और दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके पहले एसआईटी गणना कर्मियों की ड्रेस समेत अन्य गाइडलाइन की सिफारिश कर चुकी है। एसआईटी ने मंदिर की व्यवस्था, सुरक्षा, दान राशि की गणना आदि को लेकर और कई अहम सुझाव दिए हैं।