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अयोध्या में राममंदिर और बाबरी मस्जिद पर सर्वे करने वाली वेबसाइट ने मचाया हड़कंप

Sat, 25 Mar 2017 02:07 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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डेमो - फोटो : डेमो ‌प‌िक
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‘अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए या बाबरी मस्जिद? मैंने तो अयोध्या के मामले में किए जा रहे ऑनलाइन सर्वे में भागीदारी कर दी है। निवेदन है कि आप भी वोट दें।’ बृहस्पतिवार सुबह से एक वेबसाइट के लिंक के साथ वॉट्सएप और फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया में वायरल हुए इस मैसेज ने खुफिया एजेंसियों के कान खडे़ कर दिए।
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वेबसाइट उत्तर प्रदेश सरकार की ऑफिशियल साइट से मिलती-जुलती है। वेबसाइट खोलते ही होमपेज पर सीएम आदित्यनाथ योगी की तस्वीर और राम मंदिर से संबंधित मैसेज देखकर लोग इसे सरकारी सर्वे मानते हुए न सिर्फ धड़ाधड़ वोटिंग कर रहे हैं बल्कि दूसरों को लिंक भेजकर वोटिंग करने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।

सन को इसकी खबर मिली तो एसटीएफ से पड़ताल करने को कहा गया। एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि वेबसाइट www.ayodhya-issue.gov.up.in  के नाम से बनी है जो उत्तर प्रदेश सरकार की ऑफिशियल वेबसाइट www.up.gov.in जैसी ही है।
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छानबीन करने पर पता चला कि वेबसाइट दिल्ली के बाराखंबा निवासी तरुण चौधरी के नाम से रजिस्टर्ड है और इसमें दिया गया मोबाइल नंबर कर्नाटक के अख्तर अली का है। अख्तर बंगलुरू में आईटी फर्म चलाते हैं।

एसटीएफ अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया तो वह हैरान रह गए। अख्तर ने कहा कि किसी ने उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर शरारत की है। उन्होंने बंगलुरू पुलिस से इसकी शिकायत करने की बात भी कही। 
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जल्द बंद कराई जा सकती है वेबसाइट

डेमो - फोटो : डेमो ‌प‌िक
उधर यूपी सरकार के मिलते-जुलते नाम से बनाई गई वेबसाइट सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ रही है। कई लोगों ने इसे सीएम आदित्यनाथ योगी की पहल बताते हुए विवादित ढांचा बाबरी मस्जिद का है या यहां राम मंदिर था? इस पर बहस शुरू कर दी।

वेबसाइट के होमपेज पर सीएम की फोटो के साथ राम मंदिर के सर्वे को लेकर मैसेज प्रदर्शित हो रहा है। होमपेज के निचले हिस्से में उत्तर प्रदेश सरकार की ऑफिशियल वेबसाइट का लिंक भी दिया गया है। हालांकि, वेबसाइट का यूपी सरकार की ऑफिशियल वेबसाइट से कोई संबंध न होने की घोषणा भी की गई है। 

वेबसाइट के ओपिनियन पोल में राम मंदिर के निर्माण संबंधी ऑप्शन दिया गया है जिसमें सबसे ज्यादा 80 प्रतिशत वोट आए हैं। एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि किसी ने यूपी सरकार के मिलते-जुलते नाम से वेबसाइट बनाकर सर्वे शुरू किया है जिसका सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। वेबसाइट जल्द बंद कराई जा सकती है। 
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