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लोगों के निजी कम्प्यूटर पर निगरानी के सवाल पर गृहमंत्री राजनाथ बोले- संसद में दूंगा जवाब

Sun, 23 Dec 2018 05:07 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मीडिया से बातचीत के दौरान गृहमंत्री राजनाथ सिंह। - फोटो : amar ujala
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केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने देश की सभी खूफिया व सुरक्षा एजेंसियों को लोगों के निजी कंप्यूटरों में मौजूद डाटा की जांच के अधिकार देने के सवाल पर कुछ भी जवाब देने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर गृहमंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी कर दिया है। अभी मैं कुछ भी नहीं कह सकता क्योंकि संसद सत्र चल रहा है। अगर मुझसे सवाल किया गया तो मैं इसका जवाब संसद में ही दूंगा।

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आपको बता दें कि इस अधिकार के तहत, देश की सुरक्षा के लिहाज से अब सभी सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों को लोगों के निजी कंप्यूटरों का डाटा जांचने का अधिकार होगा।

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 के तहत यदि एजेंसियों को किसी भी संस्थान या व्यक्ति पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का शक होता है तो वे उनके कंप्यूटरों में मौजूद सामग्रियों को जांच सकती हैं और उन पर कार्रवाई कर सकती हैं।
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इसे लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार पर जनता की जासूसी करने का आरोप लगाया है।
 

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'भारत को विश्व का सिरमौर बनाने की जिम्मेदारी युवाओं की'

वहीं, लखनऊ में आयोजित युवा कुंभ में गृहमंत्री ने कहा, कि भारत को विश्व का सिरमौर बनाने की जिम्मेदारी देश के नौजवानों की है। भारत केवल धनबल या सैन्य शक्ति से विश्व गुरु नहीं बन सकता। धन और बल के साथ ज्ञान और विज्ञान से भारत विश्व का नेतृत्व करेगा। युवा शक्ति के बल पर ही भारत विश्व की छठी तेजी से बढ़ती आर्थिक शक्ति बना है और 2030 तक विश्व में नंबर एक स्थान प्राप्त करेगा।

युवा कुंभ के समापन सत्र में गृहमंत्री ने कहा कि भारत को विश्व गुरु के पद पर आसीन करना ही देश के नौजवानों का एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के आदर्श पर चलकर चरित्र और व्यक्तित्व निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्षों तक अंग्रेजी हुकूमत के कारण मानसिक रूप से बीमार लोग हमारे ज्ञान-विज्ञान को अपना नहीं पा रहे हैं।

दुनिया को विचार देता है कुंभ
राजनाथ ने कहा कि कुंभ केवल संगम पर डुबकी लगाने का आयोजन मात्र नहीं है। कुंभ में देश और विदेश के कोने-कोने से आए साधु-संत, महात्मा, विद्वान और शोधकर्ता चिंतन और मंथन के बाद दुनिया को विचार देते हैं। कुंभ सामाजिक चेतना की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है।
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