केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह तर्क देते हैं कि किसी काम में एक बार निराशा मिलने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य के लिए हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाया जाए। निरंतर प्रयास से ही हमें मंजिल तक पहुंचने में सफलता मिल सकती है।
इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अचानक पाकिस्तान जाने का मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि हम घुटना टेक नीति पर आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने तो बस पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ के जन्मदिन पर मुबारकबाद देने उनके घर जाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि भारत सभी समस्याओं का समाधान सौहार्दपूर्ण माहौल में संवाद के जरिये ही निकालने का पक्षधर है।
उत्तर प्रदेश के चुनाव में आगे रखे जाने वाले चेहरों को बारे में सिंह कोई स्पष्ट जवाब नहीं देते। सिर्फ इतना कहते हैं कि भाजपा सामूहिक नेतृत्व वाली पार्टी है। चुनाव में अभी लंबा वक्त है। तब की परिस्थितियों में आज की रणनीति पर काम करने का फॉर्मूला तय कर देना अव्यावहारिक है।
गृहमंत्री ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में विभिन्न मुद्दों पर बेबाक राय रखी। पेश है प्रमुख अंश :
मोदी के अचानक पाक दौरे से क्या हासिल होगा
सवाल- प्रधानमंत्री मोदी के अचानक पाकिस्तान जाने से आखिर देश को क्या हासिल होगा?
जवाब- देखिए! बात हासिल होने या न होने की नहीं है। प्रधानमंत्री ने अपनी तरफ से पहल करके विश्व को यह संदेश दिया है कि भारत, अपने पड़ोसियों से सौहार्दपूर्ण रिश्ते रखना चाहता है। समस्याओं का समाधान संवाद और संपर्क से निकालना चाहता है।
इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के जन्मदिन पर अपनी तरफ से एक पहल की। उन्होंने पाकिस्तान जाकर भारत के सकारात्मक कूटनीति के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया है। इसीलिए मैंने इसे ‘इनोवेटिव डिप्लोमेसी’ कहा है।
क्या नतीजा मिला अटल जी की कोशिशों का
सवाल- अटलजी ने भी पाकिस्तान से दोस्ताना रिश्ते बनाने के लिए कितना कुछ किया, पर कोई नतीजा निकला?
जवाब- यह बात सही है कि अतीत की कुछ घटनाएं लोगों के दिमाग में तरह-तरह के सवाल पैदा कर रही हैं, पर सरकार हाथ पर हाथ रखकर तो नहीं बैठ सकती। फिर विश्व का इतिहास देख लीजिए। समस्या का हल संवाद और संपर्क से ही निकला है।
प्रधानमंत्री ने उसी की पहल की है। मैं पहले ही कह चुका है कि रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, पर प्रयत्न छोड़े नहीं जा सकते। भारत की सकारात्मक दृष्टि का ही तो परिणाम है कि विश्व में भारत का न सिर्फ सम्मान बढ़ रहा है, बल्कि समर्थन में भी दिन-प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है। मुझे पूरा विश्वास है कि भारत को इसी मार्ग से अपने लक्ष्य में सफलता मिलेगी।
पाकिस्तान लगातार हमारे सैनिकों पर हमला करता रहा
सवाल- पर, पाकिस्तान लगातार हमारे सैनिकों पर हमला करता रहा है?
जवाब- यह काफी दुखद है, लेकिन संवाद का मतलब नीतियों में शिथिलता नहीं है। केंद्र सरकार ने सैनिकों को इस तरह की हरकतों का कड़ा जवाब देने को पहले ही कह रखा है। रिश्तों को सुधारने के लिए संवाद और संपर्क की पहल करना अलग बात है और सीमाओं की सुरक्षा तथा देश की प्रतिष्ठा को आंच न आने का मामला अलग है।
पहले की तुलना में काफी फर्क आया है। उम्मीद करते हैं कि आगे और भी फर्क दिखेगा। संवाद का मतलब घुटने टेक देना नहीं है। देश की प्रतिष्ठा को कोई आंच नहीं आने दी जाएगी।
सवाल- लोग कहते हैं कि हम अब तक दाऊद की ताजी तस्वीर तो ला नहीं पाए, उसे कैसे लाएंगे?
जवाब- (हंसते हुए) अब केंद्र सरकार इस तरह के मामलों पर सबको सभी कुछ बताकर तो रणनीति तय नहीं कर सकती। लोगों से सिर्फ यही कह सकता हूं कि इंतजार करिए। मौजूदा केंद्र सरकार ने बाह्य और आंतरिक सुरक्षा के मामले में तमाम आशंकाओं को निर्मूल साबित करके दिखा दिया है। इस मामले में भी आशंकाएं निराधार ही साबित होंगी।
... यूपी की राजनीति पर बोले राजनाथ
सवाल- उत्तर प्रदेश में भाजपा का कैसा भविष्य मानते हैं?
जवाब- काफी बेहतर है। मुझे पूरा विश्वास है कि पार्टी यहां 2014 की तरह लोगों का समर्थन प्राप्त करेगी और प्रदेश की सत्ता संभालेगी। चारों तरफ भाजपा के पक्ष में माहौल दिख रहा है।
खासतौर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभालने के बाद जिस तरह देश का सम्मान, स्वाभिमान और संस्कृति मजबूत करने का काम किया है, उससे लोगों में भाजपा के प्रति भरोसा और ज्यादा बढ़ा है।
सवाल- पार्टी किस चेहरे को आगे करके चुनाव लड़ेगी?
जवाब- भाजपा सामूहिक नेतृत्व वाली पार्टी है। हमारे यहां सभी लोग चुनाव लड़ते हैं। चुनाव हो या न हो, पार्टी चुनाव की दृष्टि से ही हमेशा तैयारी करती रहती है। फिर अभी चुनाव में वक्त भी है। इसलिए आज की परिस्थिति के आधार पर भविष्य की रणनीति को कोई अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता।
प्रत्याशी नहीं संगठन लड़ता है चुनाव
सवाल- अभी संगठन के चुनाव ही नहीं हो पाए हैं तो विधानसभा चुनाव की तैयारी कैसे हो रही होगी?
जवाब- संगठन ही तो भाजपा की असली ताकत है। हमारे यहां प्रत्याशी नहीं, संगठन ही चुनाव लड़ता है। इसलिए संगठन के चुनाव का मतलब विधानसभा चुनाव की तैयारियों से ही है। संगठन चुनाव के सहारे भाजपा के गांव-गांव पहुंचने का अर्थ तो यही है कि हमारी बात कहने वाले सक्षम लोग वहां खड़े हो गए हैं।
'यूपी में भाजपा हर सीट पर आगे है'
सवाल- भाजपा का मुकाबला किससे होगा?
जवाब- चुनाव में अभी वक्त है। आज की परिस्थिति पर भविष्य का आकलन करना काफी मुश्किल होता है। दिल्ली में ज्यादा व्यस्त होने के कारण यहां की नई स्थितियों-परिस्थितियों को लेकर तो बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है, पर मौजूदा हालात में यही लगता है कि भाजपा सभी जगह आगे है। कहीं सपा और कहीं बसपा, भाजपा से लड़ने की कोशिश कर रही है।
सवाल- प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर केंद्र सरकार चुप क्यों रहती है?
जवाब- यह मामला पूरी तरह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का है। यह बात सही है कि कभी-कभी कुछ घटनाएं चिंता पैदा करती हैं। कानून-व्यवस्था ठीक रखने के लिए केंद्र सरकार, प्रदेश को जरूरी सहायता देने के लिए हमेशा तैयार रहती है।
जल्द लखनऊ में जमीन पर दिखेंगे बड़े काम
सवाल- लखनऊ में रिंग रोड और खुर्रमनगर से लोहिया पथ को जोड़ने वाले पुल सहित कई विकास कार्य अभी जमीन पर नहीं उतरे हैं?
जवाब- बड़े कामों के लिए कई औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। विकास कार्य लगातार चल रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही बड़े काम भी जमीन पर दिखने लगेंगे। रिंग रोड के लिए ज्यादातर औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं।
मामला गजट नोटिफिकेशन के लिए गया है। पुल के लिए भी प्रदेश सरकार से औपचारिक प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेज दिया गया है। जल्द ही इसके निर्माण का बाधाएं दूर हो जाएंगी।
गोमतीनगर रेलवे स्टेशन को टर्मिनल बनाने के लिए 42 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया लगभग पूरी होने को है। सामुदायिक केंद्रों के निर्माण के लिए भी जरूरी औपचारिकताओं को काफी कुछ पूरा कर लिया गया है।
हर वार्ड में एक से दो सड़कों का निर्माण चल रहा है। जिन घरों में शौचालय नहीं है, वहां शौचालय बनाए जा रहे हैं। मार्च तक बहुत सारे काम जमीन पर दिखने लगेंगे।