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बजरंगबली के दर्शन कर राजनाथ ने भरा पर्चा

Sat, 05 Apr 2014 12:25 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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नामांकन पत्र दाखिल करने के साथ ही राजनाथ सिंह की सम्पत्ति क खुलासा हुआ। पिछले पांच सालों में राजनाथ की सम्पत्ति दोगुना बढ़ी है।
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पत्नी समेत राजनाथ की कुल सम्पत्ति 1.89 करोड़ है। उनके पास 1.90 करोड़ की अचल सम्पत्ति है। राजनाथ और उनके पत्नी के पास कुल 20.80 लाख का गहना है।

इसके अलावा उनके पास एक बंदूक, रिवॉल्वर और लखनऊ में एक बंग्ला भी है। नकदी में उनके पास 1 करोड़ 2 लाख 40 हजार रुपए हैं।

अटल की सियासत को संभालने की ख्वाहिश

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लखनऊ सीट से प्रत्याशी राजनाथ सिंह ने शनिवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया।

नामांकन करने से पहले उन्होंने हुनमान मंदिर जाकर मत्‍था टेका। करीब 10.30 बजे सुबह राजनाथ सिंह ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

राजनाथ सिंह ऐसे दूसरे मुख्यमंत्री हैं जो लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं।

राजनाथ सिंह का हमेशा से कहना रहा है कि वह लखनऊ के न होकर भी लखनऊ के हैं और अटल की सियासत को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

क्यों आए देर से लखनऊ?

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह शुक्रवार को लखनऊ देर से पहुंचे। उन्हें शुक्रवार शाम छह बजे मौसी एयरपोर्ट पर आना था, लेकिन वह दो घंटे लेट करीब आठ बजे यहां पहुंचे।

करीब पांच उन्होंने ट्वीट किया था, ‘शाम को लखनऊ पहुंचना है, लेकिन उससे पहले श्री अटल जी से दिल्ली स्थित उनके घर पर आशीर्वाद लेने जाऊंगा।’

तय समय पर एयरपोर्ट पहुंचे कार्यकर्ता देरी की वजह से बेचैन दिखे तो राजनाथ के प्रचार अभियान से जुड़े खास नेताओं ने उन्हें यही बताया कि अटल जी से आशीर्वाद लेने गए हैं।

गाजियाबाद सीट छोड़ने की क्या थी वजह?

राजनाथ सिंह ने गाजियाबाद सीट छोड़ने की वजह भी अटल बिहारी को ही बताया था। पार्टी का कहना था कि राजनाथ ने गाजियाबाद सीट इसलिए छोड़ी क्योंकि अटल जी ऐसा चाहते थे।

अब यह अलग सवाल है कि अटल जी के सहयोगी शिवकुमार जी के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री अब लिख और बोल पाने में असमर्थ हैं।

दुनिया कहती रहे कि गाजियाबाद से दुबारा चुनाव लड़ने पर हार के भय ने उन्हें पलायन के लिए मजबूर किया, मगर राजनाथ समर्थकों का जवाब हर मर्ज की ‘दवा’ माने जाने वाले ‘अटलजी’ के नाम के बिना कैसे पूरा हो सकता था।
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पर अंगरखा पहले क्यों आ गया?

यहां एक सवाल उठता है कि अगर राजनाथ सिंह अटल जी से मिलने जाने ही वाले थे, तो फिर अंगरखा उन्हीं के हाथों पहन लिए होते।

अंगरखा को पहले ही लखनऊ क्यों भेज दिया गया। बेहतर तो यही था अटल जी खुद ही अंगरखा उनके शरीर पर डाल देते।

लेकिन यह प्रश्न अभी तक अनुत्तरित ही है। खैर, मतदान तक ऐसे कई और अनुत्तरित प्रश्न दिमाग में कौंधें तो अचरज की बात नहीं।
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