अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के वरिष्ठ सदस्य राजा अयोध्या के नाम से मशहूर विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र (75) का शनिवार रात करीब 11 बजे निधन हो गया। उन्होंने अपने आवास राज सदन में अंतिम सांस ली। उनके निधन से अयोध्या में शोक की लहर दौड़ गई।
कुछ महीने पहले पैर में लगी चोट के कारण उनका ऑपरेशन हुआ था। इसके बाद उनकी सक्रियता कम हो गई थी। वह बसपा से अयोध्या से चुनाव भी लड़ चुके हैं। नजदीकी लोग और प्रशासनिक अफसर देर रात अंतिम दर्शन के लिए राज सदन पहुंचे।
राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सबसे पहले वरिष्ठ सदस्य राजा अयोध्या ही चुने गए। तब तक श्रीराम जन्मभूमि परिसर के रिसीवर रहे अयोध्या के कमिश्नर की ओर से पहला चार्ज उन्हें ही सौंपा गया। वह श्री प्रताप धर्म सेतु ट्रस्ट के अध्यक्ष भी थे।
राजा अयोध्या के छोटे भाई और साकेत कॉलेज की प्रबंध समिति के संरक्षक शैलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र चुन्नू ने देर रात बताया कि रात 11 बजे उनका ब्लड प्रेशर गिर गया। इसके बाद डॉक्टर को बुलाया गया। राज परिवार के चिकित्सक डॉ. बीडी त्रिपाठी तत्काल राजमहल पहुंचे लेकिन देर हो चुकी थी। बताया गया कि कुछ दिन पहले उनकी स्पाइन का ऑपरेशन हुआ था। तीन दिन पहले चेकअप करवाया था। सब कुछ ठीक था।
उनके बेटे यतींद्र मोहन प्रताप मिश्र प्रख्यात संगीत अध्येता और कवि हैं। प्रख्यात गायिका लता मंगेशकर पर उन्होंने लता सुर गाथा नामक किताब लिखी। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।