श्रावस्ती। जिले में हुई पहली बरसात से जलभराव हो गया। जलभराव से 24 घंटे से बाधित सिरसिया मार्ग पर देर शाम आवागमन तो बहाल हुआ। लेकिन तेंदुआरतनपुर व लक्ष्मनपुर मार्ग अब भी बाधित है। वहीं अघोषित बिजली कटौती से भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में शनिवार रात शुरू हुई झमाझम बरसात रविवार दोपहर बाद तक जारी रही। इससे राप्ती नदी, पहाड़ी व जंगली नालों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद तालाब व अन्य जलाशयों में उफान आ गया था। भिनगा व इकौना नगर, गिलौला, कटरा, जमुनहा, सिरसिया, बदला, नासिरगंज, रतनापुर बाजार सहित ग्रामीण क्षेत्रों में नालों की सफाई न होने के कारण सभी प्रमुख व अन्य संपर्क मार्ग पर जलभराव की स्थित उत्पन्न रही। जिससे सड़क व नालियों का पानी लोगों के घर व दुकान में भरने लगा था।
बरसात रुकने के बाद लोगों को जलभराव की समस्या से राह चलना दूभर बना हुआ है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस बीच बेपटरी हुई बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बार बार की जा रही अघोषित बिजली कटौती ने लोगों को बेहाल कर दिया है।
अभी बाधित है लक्ष्मनपुर व तालबघौड़ा मार्ग
नेपाल के पहाड़ों सहित तराई में हुई मूसलाधार बरसात के बाद राप्ती नदी सहित सिरसिया क्षेत्र में पड़ने वाले पहाड़ी नालों का जलस्तर काफी बढ़ गया था। जिससे भिनगा जंगल के मध्य बहाने वाला केन नाला भी उफान पर है। जंगल जलमग्न हो जाने से भिनगा सिरसिया, भिनगा तेंदुआरतनपुर सहित भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग पर रविवार शाम से ही आवागमन बाधित हो गया था। जलस्तर घटने के बाद सोमवार देर शाम सिरसिया भिनगा मार्ग पर आवागमन बहाल हो गया। वहीं भिनगा तालबघौड़ा मार्ग पर तेंदुआरतनपुर गांव के निकट केन नाले पर बने पुल पर पानी कम न होने के कारण वाहनों का आवागमन बाधित है। जबकि भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग पर रेहली विशुनपुर व भुजंगा गांव के निकट कट जाने से आवागमन बाधित है। यहां लोगों को कटान पार कराने के लिए स्थानीय लोगों द्वारा 10 रुपये प्रति व्यक्ति व 25 रुपये साइकिल तथा 50 रुपये मोटर साइकिल का देना पड़ रहा है। यहां क्षतिग्रस्त मार्ग की मरम्मत का कार्य अब तक प्रारंभ न होने के कारण चौपहिया व भारी वाहनों का आवागमन ठप है।
मेंथा की फसल के लिए नुकसानदायक बरसात
तेज बरसात के बाद जहां असिंचित क्षेत्र में किसान धान की नर्सरी डाल रहें हैं। वहीं जिन किसानों की नर्सरी तैयार थी। उनके द्वारा खेतों में धान की रोपाई कराई जा रही है। इस बरसात का धान, मक्का, गन्ना, सब्जियों व आम के किसानों को काफी फायदा मिला है। वहीं मेंथा की फसल के लिए नुकसानदायक है। बरसात के कारण जहां मेंथा ऑयल के घटकर आधा रह जाने की चिंता किसानों को सता रही है। वहीं जिन मेंथा के खेतों में बरसात का पानी भर गया उनके पूरी तरह से बर्बाद होने का खतरा बन गया है।
जिला कृषि अधिकारी आरपी राना ने बताया कि जिन मेंथा, मक्का व सब्जी के खेत में पानी भर गया है। किसान तत्काल पानी निकाल दें। ऐसा कर नुकसान से बचा जा सकता है। दो एक दिन में फिर बरसात की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में जिन किसानों ने नर्सरी नहीं डाली है। वह तत्काल धान की नर्सरी डाल दें।