तत्काल कोटे में उपलब्ध सीटों को लेकर एक बार फिर रेलवे नियमों में संशोधन की तैयारी कर रहा है।
रेलवे अब लंबी दूरी की ट्रेनों के टिकटों को जारी करने में वरीयता देने पर विचार कर रहा है जबकि, कम दूरी के स्टेशनों के लिए टिकटों की संख्या कम हो जाएगी।
तत्काल के नियमों में संशोधन के लिए रेलवे बोर्ड के आला अधिकारियों और सेंटर फॉर रेलवे इंफारमेशन सिस्टम (क्रिस) के अधिकारियों के बीच पिछले सप्ताह एक बैठक भी हुई थी।
बैठक में उठे बिन्दुओं के अनुसार दूरी के हिसाब से अलग-अलग स्लॉट बनाकर तत्काल की सीटों का कोटा तय होगा।
तत्काल कोटे के बनते हैं 60% टिकट
दरअसल अभी ट्रेनों के आरंभिक स्टेशन से बीच की दूरी के तत्काल कोटे के 60 प्रतिशत टिकट बन रहे हैं।
जबकि आरंभिक स्टेशन से अंतिम स्टेशन तक के यात्रियों को महज 40 प्रतिशत सीटें ही मिल पा रही हैं।
ऐसे में रेलवे को तत्काल चार्ज से होने वाली आय भी कम हो रही है और लंबी दूरी की ट्रेनों के यात्रियों को तत्काल कोटे से सीटें नहीं मिल पा रही हैं।
हावड़ा-अमृतसर पंजाब मेल, सियालदह एक्सप्रेस, दून एक्सप्रेस, लखनऊ यशवंतपुर एक्सप्रेस, राप्ती सागर एक्सप्रेस सहित लखनऊ से गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में आरंभिक से अंतिम स्टेशन तक के तत्काल कोटे के टिकट बड़ी संख्या में यात्रियों को नहीं मिल पा रहे हैं।
रेलवे को मिली थीं शिकायतें
पिछले दिनों रेलमंत्री को कई जोनल मुख्यालयों के शिकायत प्रकोष्ठ में इसकी शिकायतें भी मिली थी। इसे देखते हुए लंबी दूरी की ट्रेनों के यात्रियों को आसानी से तत्काल कोटे की सीटें उपलब्ध कराने के लिए रेलवे अब नया फार्मूला बनाने में जुट गया है।
रेलवे बोर्ड के सूत्रों की मानें तो तत्काल कोटा तीन स्लॉट में निर्धारित हो सकता है। पहले स्लॉट में 500 किलोमीटर तक के टिकट बनेंगे।
दूसरे स्लॉट में 1000 किलोमीटर तक की दूरी के तत्काल टिकट बनेंगे। जबकि तीसरे स्लॉट में 1000 किलोमीटर से अधिक की दूरी के टिकट बनेंगे।
पहले और दूसरे स्लॉट को मिलाकर तत्काल कोटे की संख्या 25 प्रतिशत तक होगी। जबकि तीसरे स्लॉट में लगभग 75 प्रतिशत यात्रियों को लंबी दूरी के टिकट बनाए जा सकेंगे।