रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि रेलवे की माली हालत सुधारने के लिए अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया जा रहा है। इसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरी तो कड़े कदम उठाएंगे। उनका इशारा रेलवे के निजीकरण की तरफ था। उन्होंने यूपीए सरकार के कार्यकाल में अंधाधुंध ढंग से माल भाड़ा बढ़ाए जाने और यात्री किराया न बढ़ाने के फैसले की भी आलोचना की।
रेल राज्यमंत्री रविवार को गोमती नगर में महामना मालवीय मिशन की ओर से ‘भारतीय रेल: चुनौती एवं समाधान’ विषयक विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि रेलवे की माली हालत ठीक नहीं है। हर 100 रुपये आमदनी पर 94 रुपये खर्च हो जाते हैं। सिर्फ छह रुपये की बचत में नई रेल लाइनें नहीं बिछाई जा सकतीं।
पिछले दस साल में जहां माल भाड़े में अंधाधुंध बढ़ोतरी हुई, वहीं यात्री किराया एक रुपये भी नहीं बढ़ाया गया। यही वजह है कि माल ढुलाई 70-80 फीसदी कम हो गई। अगर यात्री किराया हर साल एक रुपये भी बढ़ाया जाता तो एक साथ इतनी बढ़ोतरी नहीं करनी पड़ती।
30 साल में मंजूर हुईं 700 परियोजनाएं
सिन्हा ने कहा कि पिछले दस साल में 99 परियोजनाएं मंजूर हुईं, मगर इनमें से एक भी पूरी नहीं हुई है। पिछले 30 साल में 700 परियोजनाएं मंजूर की गईं, लेकिन इनमें से ज्यादातर अभी तक अधूरी हैं। इसलिए इस साल एक भी नई परियोजना को मंजूरी नहीं दी गई।
अगले एक से डेढ़ बरस में 30 परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजनाओं पर तेजी से काम के लिए रीजनल और जोनल स्तर पर रेलवे अधिकारियों के अधिकार बढ़ाए जा रहे हैं। इसके लिए एक कमेटी का गठन कर दिया गया है। आमदनी बढ़ाने के लिए भी विशेष कदम उठाए गए हैं।
रेल यात्रियों की शिकायत पर हो रही कार्रवाई
उन्होंने बताया कि यात्रियों से फीड बैक लेने के लिए ऑनलाइन सिस्टम शुरू किया गया है। शिकायत मिलने पर आईआरसीटीसी पर दो बार एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। किसी भी कांट्रैक्टर के खिलाफ लगातार पांच बार शिकायत मिलने पर लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मुगलसराय-इलाहाबाद रूट पर गाड़ियां सबसे ज्यादा लेट हो रही हैं। इसकी वजह ट्रैफिक लोड ज्यादा होना है। इस समस्या से निजात के लिए योजना बनाई जा रही है।
बीएचयू के लिए बने नया एक्ट
मालवीय मिशन को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के पुरातन छात्र ही चला रहे हैं। रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि बीएचयू का संचालन जनवादी तरीके से नहीं हो रहा है। अध्यादेश के माध्यम से विश्वविद्यालय को चलाया जा रहा है, जो कि गलत है।
सिन्हा ने बताया कि वहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्तियों में 5-5 लाख रुपये रिश्वत लिए जाने का मामला प्रकाश में आया है, जिससे हमारा सिर शर्म से झुक गया है।
उन्होंने कहा कि पारदर्शी व्यवस्था के लिए जरूरी है कि बीएचयू के लिए नया एक्ट बनाया जाए। इसकी कार्यकारी परिषद (ईसी) और बोर्ड में कम से कम 50 प्रतिशत एल्युमिनाई (पुरातन छात्र) रहें।