ट्रेनों में एसी श्रेणी की बोगियों के यात्रियों को इस्तेमाल हुई तकिया और चादरों से अब निजात मिल सकेगी।
गंदे बेडरोल की समस्या को देखते हुए रेलवे बोर्ड लखनऊ में रेल बजट में घोषित मैकेनाइज्ड लांड्री शुरू करने जा रहा है।
प्रतिदिन इस लांड्री से करीब 4500 बेडरोल धुलाई के बाद तैयार हो सकेंगे। एक करोड़ रुपये की लागत वाली यह लांड्री दस अगस्त से काम करना शुरू कर देगी।
इसके उद्घाटन की तिथि पर पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय को अंतिम मुहर लगानी है।
भोपाल और रायपुर गरीब रथ सहित कई ट्रेनों में 25 रुपये बेडरोल शुल्क लेने के बावजूद यात्रियों को गंदे बिस्तर मुहैया कराए जाते हैं।
बेडरोल की आपूर्ति करने वाले ठेकेदार मुनाफाखोरी के लिए उनकी धुलाई तक नहीं करते हैं।
जबकि रेलवे की ओर से ठेकेदार को हर बेडरोल का 20 से 25 रुपये तक भुगतान होता है। यात्रियों की दिक्कतों को देखते हुए रेल बजट में रेलमंत्री सदानंद गौड़ा ने रेलवे की अपनी मैकेनाइज्ड लांड्री खोलने की घोषणा कर दी।
लखनऊ में इस मैकेनाइज्ड लांड्री को खोलने का जिम्मा पूर्वोत्तर रेलवे को दिया गया। पूर्वोत्तर रेलवे ने लखनऊ जंक्शन के पास वाले हिस्से में मैकेनाइज्ड लांड्री के लिए भवन तैयार कर दिया।
यहां करीब एक करोड़ रुपये की लागत का धुलाई प्लांट लगाया गया है। इस मैकेनाइज्ड लांड्री की खासियत यह होगी कि यहां बिस्तरों की साफ धुलाई के बाद उनको ड्रायर में सूखा दिया जाएगा।
इससे बारिश के समय गीले बिस्तरों की समस्या भी यात्रियों के लिए नहीं होगी। रोजाना करीब 4500 बेडरोल की धुलाई इस मैकेनाइज्ड लांड्री से की जाएगी।
यदि लांड्री प्लांट में मानक से कम डिटर्जेंट व अन्य सामग्री व केमिकल का इस्तेमाल किया गया तो यह मशीन खुद बंद हो जाएगी।
डेढ़ टन की क्षमता वाली इस मशीन में धुलाई से जुड़े सभी सिस्टम ऑटोमेटिक होंगे।