आयकर विभाग की टीम ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सचिवालय कोऑपरेटिव बैंक पर छापेमारी की। इस दौरान आठ नवंबर के बाद एक लाख रुपये से अधिक जमा व फिक्स डिपॉजिट (एफडी) वाले अकाउंट्स का पूरा ब्यौरा ले गई। शुरूआती पड़ताल में करीब 40 एफडी शक के दायरे में आ रही हैं।
सूत्रों ने बताया कि आयकर विभाग को जानकारी मिली थी कि हजार व पांच सौ रुपये के नोटबंदी के बाद सचिवालय सहकारी बैंक में सचिवालय के बड़े अफसर अपने खास कारिंदों के नाम मोटी रकम फिक्स करा रहे हैं।
ऐसे खातों में एक लाख व उससे बड़ी राशि जमा किए जा रहे हैं, जहां कुछ दिन पहले तक कोई बड़ी राशि जमा नहीं होती थी। यही नहीं, बैक डेट में एफडी किए जाने की भी सूचना थी। इस पर सोमवार को आयकर विभाग की टीम सिक्योरिटी अमले के साथ सचिवालय परिसर स्थित कोऑपरेटिव बैंक पहुंची।
यहां बैंक के अधिकारियों से आठ नवंबर के बाद एक लाख या इससे अधिक रकम की जमा व एफडी से जुड़ा ब्यौरा मांगा गया। टीम ने बैंक से इस अवधि के बाद के सभी जमा पर्ची का भी ब्यौरा लिया।
जांच पूरी होने पर हो सकती है बड़ी कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, आयकर विभाग को करीब 65 एफडी की जानकारी मिली है, इनमें से 40 एफडी में कालेधन को सफेद किए जाने का शक है। जांच पूरी होने के बाद बड़ी कार्रवाई हो सकती है। इनकम टैक्स के अधिकारी देर रात तक बैंक में एफडी कराने वालों की सूची बनाते रहे।
बड़े-बड़े अधिकारी भी बैंक में अंशधारक
सचिवालय को-ऑपरेटिव बैंक में सचिवालय सेवा के विशेष सचिव, संयुक्त सचिव, उप सचिव, अनुसचिव, अनुभाग अधिकारी, समीक्षा अधिकारी, सहायक समीक्षा अधिकारी, कम्प्यूटर सहायक व सचिवालय के अनुसेवक सदस्य होते हैं। ये बैंक के अंशधारक होने के साथ-साथ खाताधारक भी होते हैं।
वहीं, बड़ी संख्या में सचिवालय के निजी सचिव व अपर निजी सचिव भी इसके सामान्य सदस्य होते हैं। ये अधिकारी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों व मंत्रियों के साथ तैनात रहते हैं।
इस पर उत्तर प्रदेश सचिवालय कोऑपरेटिव बैंक के सभापति आलोक सिंह का कहना है कि बैंक में सोमवार को आयकर विभाग के अधिकारी आए थे। उन्हें एक लाख रुपये से अधिक जमा वाले अकाउंट का ब्यौरा व जमा पर्ची की फोटोकॉपी दे दी गई है। इसके अलावा कुछ अन्य दस्तावेज भी मांगे हैं, इसे मंगलवार को उपलब्ध करा दिया जाएगा।